झालावाड़, संवाददाता: भगवान सिंह
अकलेरा कस्बे में मंगलवार को योग प्रशिक्षकों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर संगठित रूप से आवाज उठाई। योग प्रशिक्षक मांग को लेकर यह कदम अखिल राजस्थान योग प्रशिक्षक महासंघ (रजि.) के बैनर तले उठाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पुरुष और महिला योग प्रशिक्षकों ने भाग लिया। इस आंदोलन का उद्देश्य सरकार तक अपनी समस्याएं सीधे पहुंचाना रहा।
योग प्रशिक्षकों की वर्तमान स्थिति
जुलाई 2021 में राज्य सरकार द्वारा राजकीय आयुर्वेद औषधालयों पर पार्ट टाइम योग प्रशिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। तब से ये प्रशिक्षक पंचायत स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक योग के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचा रहे हैं। लेकिन समय बीतने के साथ योग प्रशिक्षक मांग और अधिक मजबूत होती गई क्योंकि उन्हें मिल रहा मानदेय आज के समय में अत्यंत अपर्याप्त साबित हो रहा है।
ज्ञापन सौंपने का उद्देश्य
बारां जिला अध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह और दिनेश मीणा के नेतृत्व में योग प्रशिक्षकों ने अकलेरा उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य सरकार का ध्यान योग प्रशिक्षक मांग की ओर आकर्षित करना और जल्द से जल्द ठोस निर्णय की अपेक्षा रखना था।
अल्प मानदेय से उत्पन्न समस्याएं
योग प्रशिक्षकों ने ज्ञापन में बताया कि अल्प मानदेय के कारण उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। महंगाई के इस दौर में पार्ट टाइम वेतन से घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। इसी वजह से योग प्रशिक्षक मांग अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा से भी जुड़ गई है।
फुल टाइम और संविदा कैडर की मांग
ज्ञापन के माध्यम से योग प्रशिक्षकों ने स्पष्ट रूप से फुल टाइम नियुक्ति के साथ वेतन वृद्धि की मांग रखी। साथ ही उन्होंने संविदा कैडर 2022 में शामिल किए जाने की भी मांग की, ताकि उन्हें नौकरी की स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा मिल सके। योग प्रशिक्षक मांग का यह बिंदु सबसे अहम माना जा रहा है।
प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
उपखंड अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में योग प्रशिक्षकों ने अपनी सभी मांगों को क्रमबद्ध रूप से रखा। उन्होंने उम्मीद जताई कि ज्ञापन को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा और जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन स्वीकार कर आगे भेजने का आश्वासन दिया गया।
योग प्रशिक्षकों का सामाजिक योगदान
योग प्रशिक्षक केवल नौकरी नहीं कर रहे, बल्कि समाज को स्वस्थ बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। आयुर्वेद औषधालयों, स्कूलों और पंचायत स्तर पर योग सिखाकर वे लोगों को निरोगी जीवन की दिशा दिखा रहे हैं। ऐसे में योग प्रशिक्षक मांग को केवल वेतन से जोड़कर नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, अकलेरा में उठी योग प्रशिक्षक मांग राज्यभर के योग प्रशिक्षकों की आवाज बनती नजर आ रही है। अल्प मानदेय, अस्थायी व्यवस्था और भविष्य की अनिश्चितता ने उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर किया है। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर कितना गंभीर रुख अपनाती है और कब तक योग प्रशिक्षकों को उनका हक मिलता है।
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