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21 अक्टूबर को नहीं मनाई जाएगी दिवाली: जानिए प्रदोष काल, अमावस्या तिथि और लक्ष्मी पूजा का सही संयोग

हिंदू पंचांग के अनुसार दिवाली हमेशा कार्तिक अमावस्या तिथि के प्रदोष काल में मनाई जाती है। वर्ष 2025 में अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर की शाम 5:15 बजे से शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 3:40 बजे समाप्त हो रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब अमावस्या तिथि प्रदोष काल यानी सूर्यास्त से पहले समाप्त हो जाए, तो दिवाली उस दिन नहीं मानी जाती। इसीलिए इस बार लक्ष्मी पूजा और दीपावली 20 अक्टूबर  के दिन ही मनाई जाएगी।

 

क्या होता है प्रदोष काल

प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का लगभग डेढ़ घंटे का समय होता है, जिसे विशेष रूप से लक्ष्मी पूजा के लिए शुभ माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि माता लक्ष्मी इसी काल में पृथ्वी पर अवतरित होती हैं और श्रद्धापूर्वक पूजा करने वालों के घर में स्थायी रूप से वास करती हैं। यदि अमावस्या तिथि प्रदोष काल में बनी रहती है, तभी उस दिन दिवाली मनाई जाती है।

 

दिवाली 2025 का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 6:10 से 8:25 बजे तक रहेगा। इस दौरान पूजा करने से माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। व्यापारी वर्ग इस समय को विशेष रूप से लाभदायक मानते हैं और नई बही खातों की शुरुआत भी इसी मुहूर्त में करते हैं।

 

महालक्ष्मी पूजा की विधि

20 अक्टूबर की शाम घर को दीपों और फूलों से सजाएं। लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें। पहले गणेश जी का पूजन करें, फिर माता लक्ष्मी का आह्वान करें। कमल पुष्प, चावल, हल्दी, और मिठाई अर्पित करें। अंत में आरती करें और घर के द्वार पर दीप जलाएं। यह दीप पूरे वर्ष के लिए घर में समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

 

21 अक्टूबर को क्या करें

हालांकि दिवाली 21 तारीख को नहीं है, लेकिन उस दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से अन्नकूट भोग लगाकर भगवान को प्रसन्न किया जाता है।

 

अमावस्या तिथि और संयोग

इस वर्ष की कार्तिक अमावस्या 20 और 21 अक्टूबर के बीच आ रही है, लेकिन प्रदोष काल 20 तारीख को होने के कारण मुख्य पूजा उसी दिन की जाएगी। इसके साथ ही इस बार लक्ष्मी पूजन के समय धन योग और सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है, जो इसे और अधिक शुभ बनाता है।

 

शुभ फलदायक संयोग

20 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र और सिद्ध योग का मेल बन रहा है, जो धन प्राप्ति और सफलता के लिए अत्यंत शुभ है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन लक्ष्मी पूजन करने से घर में स्थायी समृद्धि आती है और आर्थिक प्रगति के नए मार्ग खुलते हैं।

इस प्रकार ज्योतिषीय गणना के अनुसार 2025 में दिवाली 20 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी, न कि 21 अक्टूबर को। प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व होने के कारण उसी दिन दीपोत्सव मनाना शुभ रहेगा। भक्तजन श्रद्धा और नियम के साथ पूजन कर घर में धन, वैभव और सौभाग्य का स्वागत करें।

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