बूंदी_ शहर के मुख्य बस स्टैंड पर बने सुलभ कॉम्प्लेक्स में महिलाओं से टॉयलेट करने के लिए पैसे वसूलने का मामला सामने आया है। इस अवैध वसूली के खिलाफ समाजसेवी रक्तवीर राजेश खोईवाल ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
खोईवाल ने कहा कि महिलाओं से टॉयलेट के बदले में शुल्क लेना नियम विरुद्ध और संवैधानिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने सुलभ कॉम्प्लेक्स संचालक को फटकार लगाते हुए तुरंत यह अवैध वसूली बंद करने को कहा।समाजसेवी ने बताया कि बस स्टैंड पर आने वाली कई ग्रामीण महिलाएं पैसों की कमी के कारण टॉयलेट का शुल्क नहीं दे पातीं। ऐसे में वे खुले में शौच करने को मजबूर होती हैं, जिससे उनकी निजता और गरिमा दोनों का हनन होता है।उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद शर्मनाक है, क्योंकि यह ना केवल महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि स्वच्छ भारत मिशन की भावना के भी विपरीत है।
गुप्त जांच में हुआ खुलासा
रक्तवीर राजेश खोईवाल को जब महिलाओं से पैसे वसूलने की शिकायत मिली, तो उन्होंने गुप्त रूप से निरीक्षण किया।
कॉम्प्लेक्स के बाहर कुर्सी पर बैठा एक व्यक्ति जो खुद को संचालक बता रहा था, महिलाओं से टॉयलेट उपयोग करने के लिए पैसे मांग रहा था। यह देखकर उन्होंने मौके पर ही आपत्ति जताई और स्पष्ट कहा कि “किसी भी सार्वजनिक स्थल या बस स्टैंड पर महिलाओं से टॉयलेट शुल्क लेना गैरकानूनी है।”
डिपो मैनेजर को दी सूचना
रक्तवीर राजेश खोईवाल ने तत्काल बूंदी डिपो मैनेजर घनश्याम गॉड को फोन पर मामले से अवगत करवाया।
उन्होंने बताया कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के तहत महिलाओं से किसी भी सार्वजनिक स्थल, मॉल, होटल या कॉम्प्लेक्स में टॉयलेट शुल्क नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा, “यह महिलाओं की निजता की रक्षा से जुड़ा संवैधानिक अधिकार है। किसी भी परिस्थिति में उनसे टॉयलेट के पैसे मांगना अनुचित और आपराधिक कृत्य है।”डिपो मैनेजर घनश्याम गॉड ने समाजसेवी की शिकायत पर तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि आगे से किसी भी महिला से टॉयलेट शुल्क नहीं लिया जाएगा और सुलभ कॉम्प्लेक्स संचालक को इस संबंध में पाबंद किया जाएगा।उन्होंने कहा कि बस स्टैंड पर महिलाओं की सुविधा के लिए टॉयलेट हमेशा निशुल्क (Free of Cost) रहेगा और यदि भविष्य में कोई ऐसी शिकायत मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन
समाजसेवी रक्तवीर राजेश खोईवाल ने बताया कि संविधान महिलाओं को गरिमा और समानता का अधिकार देता है।
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, महिलाएं किसी भी कॉम्प्लेक्स, होटल या पब्लिक प्लेस पर टॉयलेट का निशुल्क उपयोग कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि “महिलाओं से शुल्क लेना केवल संवेदनहीनता नहीं बल्कि कानूनी उल्लंघन भी है। इस पर प्रशासन को सख्त कदम उठाना चाहिए।” बूंदी बस स्टैंड पर महिलाओं से टॉयलेट शुल्क लेना न केवल नियम विरुद्ध है बल्कि महिलाओं की निजता और गरिमा पर आघात भी है।
समाजसेवी रक्तवीर राजेश खोईवाल की तत्परता से यह मामला उजागर हुआ और प्रशासन को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने पड़े।
यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि जब तक समाज में संवेदनशील नागरिक और जागरूक समाजसेवी सक्रिय हैं, तब तक अन्याय और अव्यवस्था को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
संवाददाता_रवि शर्मा
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