टोंक,संवाददाता:(भरत शर्मा)
पीपलू उपखंड क्षेत्र के किसानों के लिए बुधवार का दिन राहत और उम्मीद लेकर आया। दौलत सागर बांध की नहरों में रबी की फसल की सिंचाई के लिए विधिवत पूजा-अर्चना के बाद पानी छोड़ा गया। जैसे ही नहरों में पानी छोड़ा गया, ग्रामीणों और किसानों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई और मंदिरों में भगवान के जयकारे गूंज उठे।जल संसाधन विभाग के कनिष्ठ अभियंता मुकेश गुर्जर ने जानकारी दी कि हाडीकलां प्रशासक ममता जाट, जल उपयोक्ता संगम अध्यक्ष कजोड़मल जाट, भोलूराम चौधरी, श्योजी बैरवा, ग्रामीण महिलाओं और किसानों की उपस्थिति में नहरों का शुभारंभ किया गया। यह पल किसानों के लिए केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक उत्सव जैसा रहा।
1955 में हुआ निर्माण, दौलत सागर आज भी किसानों की सबसे बड़ी आशा
दौलत सागर लघु सिंचाई परियोजना का निर्माण वर्ष 1955 में किया गया था। यह बांध पीपलू एवं आसपास के गांवों के किसानों के लिए वर्षों से जीवनरेखा बना हुआ है। बांध की भराव क्षमता 13 फीट (159 एमसीएफटी) है, जो रबी सीजन में पानी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करती है।वर्तमान में बांध में 12 फीट पानी भरा हुआ है, जो इस वर्ष के रबी सीजन को लेकर किसानों के चेहरों पर मुस्कान लेकर आया है। विभाग के अनुसार, उपलब्ध पानी के आधार पर दोनों मुख्य नहरों को लगभग तीन महीने तक चलाया जा सकता है, जिससे पूरे कमांड एरिया में सिंचाई संभव है।
6 गांवों की 1093 हैक्टेयर भूमि होगी सिंचित
यह परियोजना पीपलू तहसील के 6 गांवों की 1093 हैक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करती है। वर्तमान में इस क्षेत्र का इरिगेटेड एरिया 655.80 हैक्टेयर है, लेकिन पानी उपलब्धता बेहतर होने पर यह क्षमता पूरे कमांड एरिया में फैल जाती है।किसानों के अनुसार, नहरों में समय पर पानी आने से गेहूं, चना, सरसों और अन्य रबी फसलों की बुवाई समय पर हो पाएगी, जिससे उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
दांयी व बांयी नहरों की कुल लंबाई 10.797 किमी
दौलत सागर परियोजना की नहर प्रणाली भी काफी सुव्यवस्थित है।
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दांयी मुख्य नहर की लंबाई: 6.479 किमी
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बांयी मुख्य नहर की लंबाई: 4.318 किमी
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कुल लंबाई: 10.797 किमी
दोनों नहरों के माध्यम से पूरे कमांड एरिया में पानी समान रूप से वितरित किया जाता है। किसानों का कहना है कि यह नहर व्यवस्था ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
किसानों में उम्मीद—तीन महीने लगातार मिल सकेगी सिंचाई
जल संसाधन विभाग का कहना है कि पानी की मौजूदा उपलब्धता को देखते हुए नहरें लगभग तीन महीने तक चलाई जा सकती हैं। इससे न केवल सिंचाई में मदद मिलेगी, बल्कि फसल उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।स्थानीय किसान बताते हैं कि समय पर पानी मिलने से उनकी लागत भी कम होती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर बनती है। रबी सीजन में नहरों का खुलना उनके लिए किसी पर्व से कम नहीं।
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