दिल्ली का नाम बदलने की मांग, बीजेपी नेता बोले – अब Delhi नहीं Dilli होना चाहिए
देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार कारण है इसका नाम। बीजेपी के वरिष्ठ नेता **विजय गोयल** ने दिल्ली का नाम बदलकर **“दिल्ली (Dilli)”** करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इतिहास में इस शहर का नाम “धिल्लि” था, जो धीरे-धीरे “देहली” और बाद में अंग्रेज़ों के दौर में “Delhi” बन गया। गोयल का कहना है कि अब वक्त आ गया है कि हम अपनी ऐतिहासिक पहचान को वापस पाएं और राजधानी का नाम उसी रूप में रखा जाए जैसा हमारे पूर्वजों ने दिया था।
11वीं शताब्दी में ‘धिल्लि’, फारसी में ‘देहली’, अंग्रेज़ी में ‘Delhi’
विजय गोयल ने कहा कि 11वीं सदी में राजा **ढिल्लु** या **धिल्लु** ने इस शहर की स्थापना की थी, इसलिए इसका नाम “धिल्लि” पड़ा। बाद में जब दिल्ली पर सल्तनत और मुग़ल शासकों का शासन हुआ, तो फारसी प्रभाव के कारण यह नाम “देहली” बन गया। अंग्रेज़ों के शासनकाल में इसे “Delhi” लिखा जाने लगा, और वही नाम आज तक इस्तेमाल हो रहा है। गोयल का कहना है कि यह नाम हमारी असली पहचान से जुड़ा नहीं, बल्कि अंग्रेज़ीकरण का परिणाम है।
‘Delhi’ नहीं, ‘Dilli’ ही असली पहचान है – विजय गोयल
बीजेपी नेता ने कहा, > “हम सब इस शहर को अपने दिल से ‘दिल्ली’ कहते हैं, न कि ‘Delhi’। अगर जनता के मन में यही नाम बसा है, तो दस्तावेज़ों और बोर्डों पर भी यही नाम होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जैसे इलाहाबाद का नाम **प्रयागराज**, बॉम्बे का **मुंबई**, और मद्रास का **चेन्नई** किया गया, वैसे ही दिल्ली को भी उसका असली नाम **‘दिल्ली’ (Dilli)** लौटाना चाहिए। गोयल ने यह भी जोड़ा कि यह बदलाव सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि **संस्कृति और गर्व की वापसी** का प्रतीक होगा।
इतिहासकारों की राय: परंपरा बनाम आधुनिक पहचान
इतिहासकारों का मानना है कि नाम बदलने से शहर की पहचान और भावना पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि “Delhi” नाम अंतरराष्ट्रीय पहचान बन चुका है और इसे बदलना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है। वहीं कुछ विद्वान मानते हैं कि “Dilli” शब्द हमारी मिट्टी, भाषा और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। इतिहासकारों के मुताबिक “धिल्लि” शब्द संस्कृत मूल का है, जिसका अर्थ “ढीली मिट्टी” से है। यह वही क्षेत्र था जहां राजा धिल्लु ने अपना किला बसाया था।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: #DilliNotDelhi ट्रेंड में
विजय गोयल के बयान के बाद सोशल मीडिया पर #DilliNotDelhi ट्रेंड करने लगा। लोगों ने इसे लेकर मज़ेदार और तीखे कमेंट्स किए। कुछ यूज़र्स ने लिखा, “दिल्ली हमारी पहचान है, Delhi तो बस अंग्रेज़ों की देन है।” वहीं कई लोगों ने कहा कि नाम बदलने से पहले प्रदूषण, ट्रैफिक और भ्रष्टाचार पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
क्या सरकार इस प्रस्ताव पर कदम उठाएगी?
फिलहाल केंद्र या दिल्ली सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब राजधानी के नाम को लेकर चर्चा छिड़ी हो। जानकारों का कहना है कि किसी भी शहर का नाम बदलने के लिए राज्य सरकार की अनुशंसा और केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी आवश्यक होती है। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो दिल्ली भी उन शहरों की सूची में शामिल हो सकती है जिन्होंने अपने पुराने नाम वापस लिए हैं।
नाम में क्या रखा है या पहचान का सवाल?
‘Delhi बनाम Dilli’ की यह बहस सिर्फ शब्दों की नहीं, बल्कि पहचान और गर्व की है। जहां एक ओर कुछ लोग इसे भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताते हैं। जो भी हो, यह साफ है कि देश की राजधानी फिर एक बार अपने नाम को लेकर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गई है।





