जैसलमेर का रहने वाला अनु रंगा अपनी दिव्यांग पत्नी बीना रंगा के तबादले के लिए स्कूटी से जयपुर की ओर निकल पड़ा है। पत्नी की पोस्टिंग बांसवाड़ा जिले में है, जो घर से लगभग 735 किलोमीटर दूर है। अनु रंगा का कहना है कि तबादला होने तक वे वापस जैसलमेर नहीं आएंगे।
चार साल का अलगाव और पारिवारिक कठिनाई
बीना रंगा की नियुक्ति वर्ष 2019 में ग्रेड थर्ड टीचर के पद पर हुई थी। तब से वह बांसवाड़ा जिले के सेमलिया उच्च प्राथमिक स्कूल में तैनात हैं। चार साल से पति-पत्नी अलग रह रहे हैं और उनकी 13 महीने की बच्ची मां के साथ बांसवाड़ा में रहती है।
अनु रंगा ने बताया कि अलग रहना, परिवार और बच्चों की देखभाल करना बेहद कठिन रहा है। उनका उद्देश्य परिवार को एक साथ लाना और पत्नी का जैसलमेर तबादला सुनिश्चित करना है।
जयपुर तक 735 किमी की स्कूटी यात्रा
अनु रंगा ने शुक्रवार दोपहर 4 बजे गीता आश्रम, जैसलमेर से यात्रा शुरू की। रास्ते में वे पोकरण, रामदेवरा, फलोदी और नागौर से होते हुए 26 अक्टूबर को जयपुर पहुंचेंगे। उनके साथ मित्र कमल भी हैं, जो रास्ते में सुरक्षा और सहूलियत सुनिश्चित करेंगे।
अनु रंगा का कहना है कि वे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात करेंगे और अपनी पत्नी के तबादले के लिए गुहार लगाएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर तबादला नहीं हुआ तो वे CM हाउस के बाहर फुटपाथ पर भी रह सकते हैं।

तबादले की अनिश्चित स्थिति और संघर्ष
अनु रंगा ने बताया कि पिछली सरकार ने डेपुटेशन के माध्यम से तबादला किया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे निरस्त कर दिया। उन्होंने शिक्षा विभाग और राज्य सरकार के कई स्तरों पर ज्ञापन दिया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अनु रंगा का कहना है कि यह यात्रा केवल उनकी निजी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों शिक्षकों की आवाज़ का प्रतीक है, जो अपने गृह जिलों में तबादले का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग से तबादलों के नियमों में स्पष्टता की मांग भी की।
दिव्यांगता और संघर्ष के बावजूद हौंसला
अनु रंगा और बीना रंगा दोनों पैर से दिव्यांग हैं। इसके बावजूद उन्होंने यह कठिन यात्रा शुरू की है ताकि न्याय और परिवार की भलाई सुनिश्चित हो सके। उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशीलता और मानवता के दृष्टिकोण से मामले को देखने का आग्रह किया है।
अनु रंगा का कहना है, “हमारा उद्देश्य केवल अपनी पत्नी के लिए न्याय पाना है, लेकिन यह संदेश भी देना है कि कर्मचारियों और शिक्षकों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।”





