खैरथल-तिजारा:राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-919 भिवाड़ी–धारूहेड़ा खंड पर लगातार उत्पन्न होने वाली जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए बुधवार को नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव तथा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंदरजीत सिंह ने संयुक्त रूप से की।बैठक में दोनों शहरों की औद्योगिक, पर्यावरणीय और जल निकासी से जुड़ी समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की गई।बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भिवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र में बारिश के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या का स्थायी निवारण किया जाएगा।दोनों नगरों के औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट जल के उपचार के लिए समांतर व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि बरसात के मौसम में जलभराव और प्रदूषण की स्थिति उत्पन्न न हो।इसके साथ ही, यह भी सहमति बनी कि भिवाड़ी–धारूहेड़ा मार्ग पर वर्षभर निर्बाध यातायात सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक जलनिकासी प्रणाली विकसित की जाएगी।
भिवाड़ी में चल रही योजनाएँ और नई पहलें
भिवाड़ी प्रशासन ने जलभराव और प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं:
34 एमएलडी क्षमता का आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) निर्माणाधीन है, जो जल्द ही चालू किया जाएगा।
उपचारित जल को सारे खुर्द बांध तक ले जाने की योजना है, ताकि इसका उपयोग नगर वन क्षेत्र की सिंचाई में किया जा सके।
वॉटर प्लाज़ा विकसित करने की भी योजना है, जहाँ उपचारित जल की गुणवत्ता प्रदर्शित की जाएगी और औद्योगिक पुनः उपयोग का मॉडल दिखाया जाएगा।
इसके अलावा, भिवाड़ी स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) को पहले ही 6 एमएलडी क्षमता वाले ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम में अपग्रेड किया जा चुका है।इसमें अल्ट्रा फिल्ट्रेशन, रिवर्स ऑस्मोसिस और मैकेनिकल वेपर रिकंप्रेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है।यह संयंत्र फरवरी 2024 से परिचालन एजेंसी के अधीन कार्यरत है।
धारूहेड़ा में नई योजनाएँ और सहयोग
धारूहेड़ा में भी CETP और STP को उन्नत करने की योजना पर सहमति बनी है ताकि उपचारित जल को मसानी बैराज तक भेजा जा सके।दोनों राज्यों ने निर्णय लिया है कि मसानी बैराज से प्राप्त उपचारित जल का उपयोग कृषि सिंचाई, हरित क्षेत्र विकास और औद्योगिक उपयोग में किया जाएगा।यह कदम न केवल जलभराव की समस्या को हल करेगा बल्कि भविष्य की जल आवश्यकता को भी पूरा करेगा और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखेगा।
एनएचएआई द्वारा अवसंरचना सुधार
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को निर्देश दिए कि एनएच-919 पर जल निकासी व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत किया जाए।उन्होंने कहा कि आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम और वर्षा जल प्रबंधन तकनीक के माध्यम से नाले विकसित किए जाएं, ताकि बारिश का पानी मसानी बैराज तक सुचारू रूप से प्रवाहित हो सके।
समन्वित प्रयासों की आवश्यकता
बैठक में मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल जलभराव की समस्या नहीं, बल्कि जल संसाधन प्रबंधन, शहरी विकास और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ा हुआ व्यापक विषय है।इसलिए सभी एजेंसियों को साझा दृष्टिकोण और समन्वयित कार्य प्रणाली अपनाने का निर्देश दिया गया।बैठक में सहमति बनी कि यह पहल भिवाड़ी–धारूहेड़ा क्षेत्र को जलभराव-मुक्त, प्रदूषण-मुक्त और सतत विकास के मॉडल क्षेत्र के रूप में विकसित करेगी।दोनों राज्यों की एजेंसियाँ एक संयुक्त मॉनिटरिंग मैकेनिज्म तैयार करेंगी, ताकि सभी निर्णयों का समयबद्ध क्रियान्वयन हो सके।एनएच-919 भिवाड़ी–धारूहेड़ा खंड पर जलभराव का समाधान अब केवल इंजीनियरिंग नहीं बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक समन्वय का मामला बन गया है।केंद्रीय मंत्रियों की यह बैठक इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले समय में इस क्षेत्र को सतत विकास और जल प्रबंधन के आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित कर सकती है।एनएच-919 भिवाड़ी–धारूहेड़ा खंड पर जलभराव का समाधान अब केवल इंजीनियरिंग नहीं बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक समन्वय का मामला बन गया है।केंद्रीय मंत्रियों की यह बैठक इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले समय में इस क्षेत्र को सतत विकास और जल प्रबंधन के आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित कर सकती है।
संवाददाता_मुकेश कुमार शर्मा
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