बाड़मेर, संवाददाता: जसवंत सिंह राठौड़
Suzlon Negligence Incident ने शिव क्षेत्र के पुसड़ और बिशुखुर्द गांवों में आक्रोश की स्थिति पैदा कर दी है। सुजलॉन कंपनी द्वारा पवन ऊर्जा परियोजना के लिए नई विद्युत लाइन बिछाने का काम चल रहा था। लेकिन कंपनी की भारी लापरवाही की वजह से यह कार्य अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे ग्रामीणों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई।
कैसे हुई घटना?
जिस रास्ते से रोज ग्रामीणों का आवागमन होता है, उसी मार्ग पर सुजलॉन कंपनी नई लाइन डाल रही थी। दो दिन पहले कंपनी के कर्मचारियों ने काम बीच में ही छोड़ दिया। अधूरे कार्य के कारण तीन विद्युत तार बेहद खतरनाक रूप से नीचे लटके रह गए—जमीन से मात्र 2 फीट, 4 फीट और 7 फीट की ऊँचाई पर।
खतरनाक रूप से लटकी विद्युत लाइनें—लापरवाही की चरम सीमा
ग्रामीणों ने बताया कि ये तार एक ऐसी सड़क पर लटके हुए थे जिसे रोजाना सैकड़ों लोग पार करते हैं। इतने नीचे लटका बिजली का तार किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकता था। Suzlon Negligence Incident में यह स्पष्ट है कि कंपनी ने न तो सुरक्षा मानकों का पालन किया और न ही क्षेत्र में कोई चेतावनी संकेत लगाए।
स्थानीय कलाकार सरूप खान गंभीर रूप से घायल
इसी लापरवाही का शिकार हुए पुसड़ गांव के स्थानीय कलाकार सरूप खान, पुत्र हैदर खान। वे रास्ते से गुजर रहे थे, तभी झूलते विद्युत तार की चपेट में आ गए। हादसा इतना गंभीर था कि सरूप खान बुरी तरह घायल हो गए और उन्हें तुरंत उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। उनकी हालत अभी भी चिंताजनक बताई जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप: दो दिन से अधूरा काम
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सुजलॉन कंपनी ने पिछले दो दिनों से काम को अधूरा छोड़ रखा है। न तो कर्मचारियों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया और न ही सुरक्षा व्यवस्था की गई। Suzlon Negligence Incident ग्रामीणों के अनुसार, “कंपनी के निजी स्वार्थ और लापरवाही” का परिणाम है।
कंपनी से संपर्क पर भी नहीं मिला जवाब
ग्रामीणों ने कंपनी के अधिकारियों से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने उचित जवाब नहीं दिया। न कोई अधिकारी मौके पर आया और न ही सुधारात्मक कार्रवाई की गई। इससे ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया।
प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से न्याय की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि सुजलॉन कंपनी की लापरवाही से एक प्रतिभाशाली कलाकार की जान खतरे में पड़ गई। ग्रामीण चाहते हैं कि: घटना की उच्च स्तरीय जांच हो, सरूप खान को न्याय मिले, कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की जाए, जल्द से जल्द विद्युत लाइन को सुरक्षित किया जाए।
ग्रामीणों का धरना–प्रदर्शन
जब शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना–प्रदर्शन शुरू कर दिया। सभी ग्रामवासी एकजुट होकर यह मांग कर रहे हैं कि जब तक कंपनी जवाबदेही नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यह घटना दिखाती है कि ग्रामीणों की आवाज़ को बार-बार अनसुना करना किस तरह सामाजिक तनाव को जन्म देता है।
Suzlon Negligence Incident का सामाजिक प्रभाव
यह मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि ग्रामीण संरचना में व्यावसायिक कंपनियों की जवाबदेही का सवाल भी है। ग्रामीण इलाकों में प्रोजेक्ट चलाने वाली कंपनियों को सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। Suzlon Negligence Incident ने यह साफ कर दिया है कि लापरवाह व्यवस्था लोगों की जान खतरे में डाल सकती है। स्थानीय कलाकार, जो कला व संस्कृति का संवाहक होता है, उसका इस तरह घायल होना पूरे समाज के लिए नुकसानदायक है।
लापरवाही कब बंद होगी?
यह घटना बताती है कि विकास परियोजनाओं में सुरक्षा और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है। सुजलॉन कंपनी की लापरवाही ने एक परिवार को संकट में डाल दिया और पूरे गांव को आक्रोश में भर दिया। Suzlon Negligence Incident को उदाहरण बनाकर ऐसी कंपनियों को चेतावनी मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी दुर्घटना न हो।
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