बारां, संवाददाता: जय प्रकाश शर्मा
कस्बा मांगरोल के उपजिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आ रही है। उपजिला चिकित्सालय होने के बावजूद यहां पिछले लगातार 15 दिनों से एक्सरे मशीन खराब पड़ी हुई है, जिससे अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक्सरे मशीन खराब होने के कारण हड्डी, चोट, दुर्घटना और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों को मजबूरन अस्पताल के बाहर स्थित निजी एक्सरे दुकानों पर जाना पड़ रहा है। इन निजी दुकानों पर एक्सरे कराने के नाम पर मरीजों से मनमानी राशि वसूली की जा रही है। जबकि सरकार द्वारा उपजिला चिकित्सालय में निशुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है।
उच्च अधिकारियों का नहीं जा रहा ध्यान
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में एक्सरे मशीन बार-बार खराब हो जाती है, लेकिन इसकी स्थायी मरम्मत या समाधान की ओर चिकित्सा विभाग के उच्च अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। मशीन खराब होने से सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और ग्रामीण मरीजों को उठाना पड़ रहा है, जो निजी जांच का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं।
चिकित्सा प्रभारी का बयान
जब इस संबंध में चिकित्सा प्रभारी सौभाग मल मीना से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि एक्सरे मशीन खराब होने की सूचना उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि जैसे ही मशीन का खराब पार्ट प्राप्त होगा, उसे जल्द ठीक करवा दिया जाएगा। वहीं एक्सरे ऑपरेटर कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने मशीन खराब होने की शिकायत कई बार ऑनलाइन माध्यम से भेजी है। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऊपर संपर्क करने पर यही कहा जाता है कि जल्द ही मशीन का पार्ट भेज दिया जाएगा।
डॉक्टरों की भारी कमी, मरीज रेफर होने को मजबूर
Mangrol Hospital में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति इससे भी ज्यादा चिंताजनक है। यहां 25 डॉक्टरों के पद स्वीकृत होने के बावजूद फिलहाल केवल 7 डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं, जबकि शेष पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। अस्पताल में नाक-कान-गला, लीवर और हड्डी रोग विशेषज्ञ तक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को मजबूरन बारां और कोटा के बड़े चिकित्सालयों में रेफर किया जा रहा है। इससे मरीजों को समय, पैसा और स्वास्थ्य तीनों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकारी खर्च के बावजूद मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ
स्वास्थ्य चिकित्सा विभाग द्वारा अस्पताल के विकास और सुविधाओं पर लाखों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद आम मरीजों को इसका कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। संसाधनों की कमी, मशीनों की खराबी और डॉक्टरों के रिक्त पदों के चलते सरकारी योजनाएं कागजों तक ही सीमित नजर आ रही हैं।
जनता की मांग – चिकित्सा विभाग दे ध्यान
स्थानीय नागरिकों और मरीजों ने चिकित्सा विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द एक्सरे मशीन को ठीक कराया जाए और चिकित्सालय में डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरा जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
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