आज देवउठनी एकादशी का पवित्र व्रत रखा जा रहा है, जिसे देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के जागरण का प्रतीक माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज दशमी तिथि प्रातः 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ होगा।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
1 नवंबर 2025 को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 33 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 37 मिनट पर होगा। आज का दिन शनिवार का है और विक्रम संवत 2082 चल रहा है।
आज के शुभ मुहूर्त
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:49 से 5:41 तक
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विजय मुहूर्त: दोपहर 1:55 से 2:39 तक
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निशिथ काल: रात 11:39 से 12:31 तक
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गोधूलि बेला: शाम 5:36 से 6:02 तक
इन मुहूर्तों में भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर व्रत आरंभ करने से पापों का नाश होता है।
आज का राहुकाल और अशुभ समय
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राहुकाल: सुबह 9 बजे से 10:30 बजे तक
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गुलिक काल: सुबह 6 बजे से 7:30 बजे तक
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यमगंड काल: दोपहर 1:30 बजे से 3:30 बजे तक
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दुर्मुहूर्त: सुबह 8:45 से 9:30 तक
इन समयों में किसी शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। पूजा या यात्रा से पहले इन कालों से बचना शुभ रहेगा।
चंद्र और नक्षत्र की स्थिति
चंद्रमा दिन-रात कुंभ राशि में संचार करेगा। शतभिषा नक्षत्र सायं 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र आरंभ होगा। ध्रुव योग अर्धरात्रि के बाद 2:09 बजे तक रहेगा, उसके बाद व्याघात योग प्रारंभ होगा।
आज का व्रत और त्यौहार
देव प्रबोधिनी एकादशी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। इस अवसर पर तुलसी विवाह, गंगाजल स्नान और व्रत का विशेष महत्व होता है।
आज का उपाय
आज के दिन भगवान विष्णु को सिंघाड़े का भोग लगाना शुभ फलदायी होता है। इससे परिवार में सुख-समृद्धि आती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
आध्यात्मिक महत्व
देवउठनी एकादशी से विवाह, यज्ञ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत का समय माना जाता है। भक्त इस दिन तुलसी दल अर्पित कर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। माना जाता है कि इस व्रत से मोक्ष की प्राप्ति होती है और सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
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