रानीवाड़ा, संवाददाता: जितेन्द्र दहिया
रानीवाड़ा उपखंड की ग्राम पंचायत भक्तों का वास (डूंगरी) में गौचर और औरण भूमि अतिक्रमण का गंभीर मामला सामने आया है। गांव की मुख्य आबादी भूमि के चारों ओर स्थित गौचर, नाड़ी और औरण भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे किए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह अतिक्रमण अब गांव के अस्तित्व और पशुपालन व्यवस्था के लिए खतरा बनता जा रहा है।
डूंगरी गांव की स्थिति और भौगोलिक पृष्ठभूमि
डूंगरी गांव में आबादी क्षेत्र के चारों ओर स्थित भूमि परंपरागत रूप से गौचर और औरण के रूप में दर्ज है। यह भूमि न केवल पशुओं के चरने के लिए बल्कि भविष्य की सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भी आरक्षित रहती है। गौचर और औरण भूमि अतिक्रमण के चलते यह संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है।
गौचर और औरण भूमि पर पक्के निर्माण
ग्रामीणों के अनुसार कुछ लोगों ने गौचर और औरण भूमि पर कब्जा कर पक्के निर्माण कर लिए हैं। कई स्थानों पर चारदीवारियां खड़ी कर दी गई हैं, जिससे भूमि का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। यह अतिक्रमण खुलेआम किए जाने के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई के अभाव में बढ़ता चला गया।
पशुपालन पर पड़ता सीधा असर
गौचर और औरण भूमि अतिक्रमण का सबसे बड़ा असर पशुपालन पर पड़ा है। गायों और अन्य पशुओं के चरने के लिए उपलब्ध भूमि लगभग समाप्त हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं को अब दूर-दराज के क्षेत्रों में ले जाना पड़ रहा है, जिससे समय और संसाधनों की हानि हो रही है।
सार्वजनिक उपयोग की भूमि होती जा रही खत्म
गौचर और औरण भूमि केवल पशुपालन के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य की सरकारी योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। ग्रामीणों का कहना है कि अतिक्रमण के कारण अब स्कूल, अस्पताल, सड़क या अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भूमि शेष नहीं बची है। यह स्थिति आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है।
ग्रामीणों का प्रशासन पर आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गौचर और औरण भूमि अतिक्रमण की शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे अतिक्रमण करने वालों के हौसले और बढ़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो हालात इतने गंभीर नहीं होते।
एसडीएम को सौंपा गया ज्ञापन
इस समस्या को लेकर समस्त ग्रामवासियों ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) रानीवाड़ा को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में गौचर और औरण भूमि का सीमांकन, जिसे नाड़ा सीमांकन भी कहा जाता है, करवाने की मांग की गई। साथ ही अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
ग्राम पंचायत की निष्क्रियता पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले ग्राम पंचायत स्तर पर भी शिकायत दर्ज करवाई थी। बावजूद इसके पंचायत द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। पंचायत की निष्क्रियता के कारण अतिक्रमण करने वालों के हौसले और मजबूत हो गए।
भविष्य को लेकर ग्रामीणों की चिंता
ग्रामीणों को डर है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो गांव की पूरी सार्वजनिक भूमि निजी कब्जों में चली जाएगी। इससे न केवल पशुपालन बल्कि गांव का समग्र विकास भी प्रभावित होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
तत्काल कार्रवाई की जरूरत
डूंगरी गांव में गौचर और औरण भूमि अतिक्रमण अब एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक समस्या बन चुकी है। यदि समय रहते सीमांकन कर अवैध कब्जे नहीं हटाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
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