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किसान सेवा केंद्रों की लापरवाही से असली किसान वंचित, सरकारी योजनाएं बनी औपचारिकता

मालपुरा (टोंक): सरकार द्वारा किसानों के सशक्तिकरण और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए चलाई जा रही विभिन्न अनुदान योजनाएं अब सिर्फ कागज़ों तक सीमित होती दिखाई दे रही हैं। उपखंड क्षेत्र के किसान सेवा केंद्रों पर अनुदानित बीज किट, कीट नियंत्रण दवाइयों और उर्वरकों के वितरण में भारी लापरवाही और अनियमितताएं सामने आ रही हैं।ग्रामीणों का कहना है कि किसान सेवा केंद्रों पर कई बार गैर-हकदार लोग या बिचौलियेखसरा गिरदावरी” के नाम पर सरकारी बीज किट उठा लेते हैं और बाद में उन्हें बाजार में बेच देते हैं। ऐसे में जिन असली किसानों के नाम पर सरकारी अनुदान जारी किया जाता है, वे लाभ से वंचित रह जाते हैं।स्थानीय किसान रामस्वरूप गुर्जर ने बताया कि उन्होंने तीन बार आवेदन करने के बावजूद अभी तक बीज किट नहीं ली, जबकि उनके नाम पर रिकॉर्ड में वितरण दिखाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि “यह सब मिलीभगत से हो रहा है, और इसका नुकसान असली किसानों को उठाना पड़ रहा है।”

 

बीज उपचार दवाइयाँ सेवा केंद्रों पर पड़ी सड़ रही हैं

जानकारी के अनुसार, कृषि विभाग द्वारा भेजी गई बीज उपचार दवाइयाँ कई सेवा केंद्रों पर समय पर वितरित नहीं की जा रही हैं। कुछ केंद्रों पर दवाइयाँ बिगड़ चुकी हैं या एक्सपायर हो चुकी हैं।ग्रामीणों का कहना है कि समय पर वितरण न होने से ये दवाइयाँ बेकार पड़ी-पड़ी सड़ रही हैं, जबकि ज़रूरतमंद किसान इन्हें पाने के लिए लगातार चक्कर काटते रहते हैं।

सरकारी योजनाओं की मंशा पर उठ रहे सवाल

सरकार की मंशा किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त करने और आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की है, लेकिन जमीनी स्तर पर योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।
बीज किट और कीटनाशक वितरण में पारदर्शिता न होने के कारण योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

किसानों की मांग – जांच और कार्रवाई जरूरी

किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि वे किसान सेवा केंद्रों की नियमित जांच करें और जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस गड़बड़ी में शामिल पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।किसान श्यामलाल मीणा ने कहा कि “अगर समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो यह योजनाएं सिर्फ भ्रष्टाचार का साधन बनकर रह जाएंगी और किसान का भरोसा सरकार से उठ जाएगा।”

समाधान और सुधार की जरूरत

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान सेवा केंद्रों पर डिजिटल निगरानी व्यवस्था (Online Distribution System) लागू की जाए, तो इस तरह की गड़बड़ियों पर रोक लगाई जा सकती है। साथ ही, हर केंद्र पर लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होनी चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

प्रशासन की भूमिका और जिम्मेदारी

प्रशासन को चाहिए कि वह यह सुनिश्चित करे कि अनुदान योजनाओं का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचे। हर वितरण प्रक्रिया में ऑडिट टीम और कृषि निरीक्षकों की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। इससे योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ेगी और असली किसान लाभान्वित होंगे।मालपुरा क्षेत्र के किसान सेवा केंद्रों में हो रही लापरवाही ने सरकारी योजनाओं की सच्चाई उजागर कर दी है। सरकार की मंशा भले ही किसानों तक अनुदान और संसाधन पहुंचाने की हो, लेकिन यदि निगरानी व्यवस्था सुदृढ़ नहीं की गई, तो असली किसान हमेशा वंचित रहेंगे। किसानों ने स्पष्ट कहा है कि अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि न्याय और जवाबदेही चाहिए।

 

संवाददाता_कमलेश प्रजापति

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