टोंक, संवाददाता: सुरेश भदाला
पर्वतीय क्षेत्रों की पारंपरिक और बहुमूल्य नस्ल गद्दी भेड़ के संरक्षण एवं उन्नतिकरण को लेकर gaddi sheep conservation विषय पर उत्तरी शीतोष्ण क्षेत्रीय केंद्र (एनटीआरएस) गड़सा में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक 25 दिसंबर 2025 को संपन्न हुई, जिसमें परियोजना की प्रगति, उपलब्धियों और भविष्य की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
एनटीआरएस गड़सा का महत्वपूर्ण दौरा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्यरत ICAR‑Central Sheep and Wool Research Institute के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारी के साथ Northern Temperate Regional Station का दौरा किया। यह दौरा गद्दी भेड़ नस्ल के संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गद्दी भेड़ नस्ल का क्षेत्रीय महत्व
गद्दी भेड़ नस्ल हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों, विशेषकर कुल्लू और चंबा जिलों की आजीविका, संस्कृति और पारिस्थितिकी से गहराई से जुड़ी हुई है। gaddi sheep conservation केवल पशुधन सुधार का विषय नहीं, बल्कि पर्वतीय समुदायों के जीवन-यापन और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है।
परियोजना की प्रगति और उद्देश्य
एनटीआरएस गड़सा के हुरला अनुभाग में नेटवर्क गद्दी परियोजना एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) परियोजना के अंतर्गत गद्दी भेड़ नस्ल के संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक प्रबंधन का कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य नस्ल की शुद्धता बनाए रखते हुए उत्पादन क्षमता, अनुकूलनशीलता और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना है।
वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा
समीक्षा बैठक के दौरान gaddi sheep conservation से जुड़े कई अहम पहलुओं पर चर्चा की गई। इनमें प्रजनन प्रबंधन, स्वास्थ्य देखभाल, संतुलित पोषण, अभिलेख संरक्षण, आनुवंशिक मूल्यांकन और किसानों तक तकनीक हस्तांतरण जैसे विषय शामिल रहे। वैज्ञानिकों ने परियोजना को और प्रभावी बनाने के लिए कई सुधारात्मक सुझाव भी दिए।
चयनित गद्दी भेड़ों का समावेशन
परियोजना के अंतर्गत चंबा जिले की पांगी घाटी और कुल्लू जिले के विभिन्न क्षेत्रों से चयनित गद्दी भेड़ों की खरीद कर उन्हें संस्थान में शामिल किया गया है। इससे gaddi sheep conservation के तहत बेहतर जर्मप्लाज्म विकसित करने में सहायता मिल रही है, जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अधिक सक्षम और टिकाऊ है।
निदेशक का संबोधन और दिशा-निर्देश
संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने अपने संबोधन में गद्दी भेड़ नस्ल के राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह नस्ल पर्वतीय क्षेत्रों की रीढ़ है और इसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। उन्होंने अनुसंधान गतिविधियों को सीधे किसानों की जरूरतों से जोड़ने पर विशेष बल दिया।
प्रशासनिक व वित्तीय मजबूती पर जोर
डॉ. तोमर ने प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए, ताकि gaddi sheep conservation से जुड़ी परियोजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों की सराहना की।
एनटीआरएस प्रमुख का वक्तव्य
एनटीआरएस गड़सा के प्रमुख डॉ. आर. पुरुषोत्तम ने चल रही परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए अनुसंधान गतिविधियों को और अधिक मजबूत बनाने की बात कही तथा निदेशक से मार्गदर्शन प्राप्त किया।
वैज्ञानिकों और कर्मचारियों की सहभागिता
समीक्षा बैठक के दौरान नेटवर्क गद्दी परियोजना के पीआई वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल रहीम, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. रजनी चौधरी, डॉ. पल्लवी चौहान सहित संस्थान का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। सभी वैज्ञानिकों ने gaddi sheep conservation के लिए अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।
पर्वतीय पशुपालकों के लिए लाभ
यह दौरा और समीक्षा बैठक गद्दी भेड़ नस्ल के दीर्घकालिक संरक्षण और सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। इससे पर्वतीय पशुपालकों को बेहतर जर्मप्लाज्म, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और सतत आजीविका के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
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