जालोर ,संवाददाता :जसराज पुच्छल
जालोर जिले के आहोर उपखंड के मालगढ़ गांव में शिक्षा व्यवस्था चरमराने से ग्रामीणों का सब्र टूट गया है।यहां राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (RauMavi Malgarh) में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर पिछले तीन दिनों से ग्रामीणों द्वारा तालाबंदी जारी है।स्कूल का संचालन पूरी तरह ठप है। छात्र-छात्राएं घरों में हैं और अभिभावक विद्यालय के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
विभागीय अधिकारियों की चुप्पी पर भड़के ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार विरोध और तालाबंदी के बावजूद शिक्षा विभाग के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने अब तक मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठाई।रिपोर्टर जसराज पुच्छल (पांचोंटा) के अनुसार, आक्रोशित ग्रामीणों ने अब प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे जालोर–जोधपुर स्टेट हाइवे जाम करेंगे।ग्रामीणों ने गुरुवार सुबह पंचायत भवन में बैठक कर रणनीति तय की और इसके बाद हाईवे जाम करने के लिए जुलूस के रूप में रवाना हो गए।
सीबीईओ का बयान—“तालाबंदी गैरवाजिब, 3 शिक्षक लगाए हैं”
इस पूरे मामले पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) रामेश्वर प्रसाद हिंडाला ने प्रतिक्रिया दी है।उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मांगों को ध्यान में रखते हुए तीन नए शिक्षक स्कूल में पहले ही नियुक्त किए जा चुके हैं।इसके बावजूद तालाबंदी जारी रखना गैरवाजिब है।उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे आंदोलन खत्म कर बच्चों की पढ़ाई फिर से शुरू करने दें।
ग्रामीणों का पलटवार — “थर्ड ग्रेड शिक्षक लगाकर लीपापोती की”
हालांकि, ग्रामीणों ने CBEO के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग ने सिर्फ थर्ड ग्रेड शिक्षक भेजकर “औपचारिकता निभाई” है।ग्रामीणों का कहना है कि मालगढ़ जैसे बड़े क्षेत्र की सीनियर स्कूल में व्याख्याता और वरिष्ठ शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य है।“तीन जूनियर शिक्षकों से हायर सेकेंडरी स्तर की पढ़ाई नहीं हो सकती,” ग्रामीणों का कहना है।उनका आरोप है कि शिक्षा विभाग हर बार अस्थायी समाधान करता है, लेकिन स्थायी रूप से व्याख्याताओं की नियुक्ति की दिशा में कोई कदम नहीं उठाता।
हाईवे जाम से प्रशासन में मचा हड़कंप
तालाबंदी के तीसरे दिन जब ग्रामीणों ने हाईवे जाम की चेतावनी दी, तो प्रशासन में हड़कंप मच गया।पुलिस बल मौके पर भेजा गया है और अधिकारियों को स्थिति संभालने के निर्देश दिए गए हैं।ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक योग्य शिक्षक (Lecturers) की नियुक्ति नहीं होती, तब तक स्कूल नहीं खुलने देंगे।
ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ मालगढ़ गांव का नहीं है — यह पूरे राजस्थान की ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई उजागर करता है।कई सीनियर स्कूलों में योग्य शिक्षकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि विभाग फाइलों में सुधार का दावा करता रहता है।मालगढ़ के ग्रामीणों का संघर्ष इस बात की मिसाल है कि गांवों में शिक्षा को लेकर अब लोग अपना हक मांगने के लिए सड़कों पर उतरने लगे हैं।मालगढ़ राउमावि की तालाबंदी ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों की हकीकत उजागर कर दी है।जब तक व्याख्याता और वरिष्ठ शिक्षक नहीं लगाए जाते, ग्रामीण आंदोलन जारी रखने के मूड में हैं।अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग कब तक इस “ग्रामीण विद्रोह” को अनदेखा करता है या फिर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाता है।
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