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Phool Dol Festival

Phool Dol Festival: किशनगंज में 140वें ऐतिहासिक फूल डोल लोक उत्सव की तैयारियां शुरू, नई कार्यकारिणी गठित

बारां, संवाददाता: मदनलाल शाक्यवाल

 

किशनगंज कस्बे में आयोजित होने वाला Phool Dol Festival क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। यह लोक उत्सव पिछले 139 वर्षों से लगातार मनाया जा रहा है और इस वर्ष इसका 140वां आयोजन होने जा रहा है। होली पर्व की दुल्हैड़ी के दिन मनाया जाने वाला यह उत्सव ग्रामीण परंपराओं, आस्था और सामूहिक सहभागिता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

 

140वें फूल डोल लोक उत्सव की तैयारी

ऐतिहासिक Phool Dol Festival के 140वें आयोजन को लेकर किशनगंज कस्बे में ग्रामवासियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक चारभुजा मंदिर परिसर में संपन्न हुई, जिसकी अध्यक्षता पटेल मनोज चौधरी ने की। बैठक में उत्सव की तैयारियों, व्यवस्थाओं और आयोजन को भव्य स्वरूप देने पर विस्तार से चर्चा की गई।

 

बैठक में नई कार्यकारिणी का गठन

बैठक के दौरान फूल डोल लोक उत्सव की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। सर्वसम्मति से चंद्रप्रकाश चौधरी (सी.पी.) को Phool Dol Festival का अध्यक्ष चुना गया। ग्रामवासियों ने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में इस ऐतिहासिक लोक उत्सव को और अधिक भव्यता मिलेगी। कार्यकारिणी गठन के बाद आयोजन की रूपरेखा तय करते हुए सभी जिम्मेदारियां तय की गईं।

 

पूजा-अर्चना से होगी उत्सव की शुरुआत

निर्णय लिया गया कि आगामी रविवार को चौमुखा बाजार स्थित भैरवनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ Phool Dol Festival की तैयारियों का विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद कस्बे में उत्सव संबंधी गतिविधियां शुरू होंगी, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की भागीदारी रहेगी।

 

ग्रामवासियों में उत्साह और सहभागिता

बैठक में आयोजन समिति के स्थायी अध्यक्ष पटेल मनोज चौधरी, युग बंधु जैन, रवि कटारिया, रवि गुर्जर, वार्ड पंच रामनिवास सुमन, सोनू मेघवाल, गजेंद्र सिंह सहित अनेक ग्रामवासी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर Phool Dol Festival को ऐतिहासिक और यादगार बनाने का संकल्प लिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह लोक उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। हर वर्ष आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग इस उत्सव में शामिल होते हैं।

 

संस्कृति और परंपरा का जीवंत उदाहरण

Phool Dol Festival किशनगंज की सांस्कृतिक चेतना को जीवंत बनाए रखने वाला उत्सव है। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र बनी हुई है। 140वें आयोजन को लेकर पूरे कस्बे में उत्साह का माहौल है और लोग इसे सफल बनाने के लिए पूरी निष्ठा से जुटे हुए हैं।

 

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