नागौर, संवाददाता: चंद्रशेखर शर्मा
नागौर जिले के थाँवला कस्बे के प्रतिभाशाली युवा कलाकार प्रियेन्द्र कुमावत ने state level art selection के तहत राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में चयनित होकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। संभाग स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की, जिससे कला जगत में उनकी प्रतिभा को नई पहचान मिली है।
थाँवला के कलाकार की सफलता
थाँवला कस्बा, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, एक बार फिर गौरवान्वित हुआ है। प्रियेन्द्र कुमावत की इस सफलता से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा थाँवला और आसपास का क्षेत्र उत्साह से भर गया है। state level art selection में उनका चयन स्थानीय कला प्रतिभाओं के लिए गर्व का विषय बन गया है।
संभाग स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता
यह प्रतिष्ठित संभाग स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता संभागीय आयुक्त के निर्देशन में आयोजित की गई थी, जिसमें अजमेर संभाग के विभिन्न जिलों से चयनित श्रेष्ठ कलाकारों ने भाग लिया। प्रतियोगिता का स्तर अत्यंत उच्च था और निर्णायक मंडल में कला क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञ शामिल थे, जिससे state level art selection की प्रक्रिया और अधिक प्रतिस्पर्धात्मक बन गई।
लोक कलाकार वर्ग में प्रथम स्थान
लोक कलाकार वर्ग में प्रियेन्द्र कुमावत द्वारा प्रस्तुत की गई कलाकृति को निर्णायकों ने सर्वश्रेष्ठ घोषित करते हुए प्रथम स्थान प्रदान किया। उनकी रचना में राजस्थान की पारंपरिक लोक संस्कृति, रंगों की सजीवता और भावनात्मक गहराई का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसने निर्णायक मंडल को विशेष रूप से प्रभावित किया।
कलाकृति की विशेषताएं
प्रियेन्द्र की कलाकृति में लोक जीवन के दृश्य, सांस्कृतिक प्रतीक और मानवीय संवेदनाओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया था। तकनीकी दक्षता के साथ-साथ भावनात्मक प्रस्तुति ने उनकी रचना को विशिष्ट बना दिया। यही कारण रहा कि state level art selection में उनकी कलाकृति ने अन्य प्रतिभागियों पर बढ़त बनाई।
जिला स्तर से राज्य स्तर तक का सफर
यह सफलता किसी एक दिन का परिणाम नहीं है। इससे पूर्व भी प्रियेन्द्र कुमावत ने जिला कलेक्टर के निर्देशन में आयोजित जिला स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। जिला स्तर से संभाग स्तर और अब राज्य स्तर तक का यह सफर उनकी मेहनत, निरंतर अभ्यास और कला के प्रति समर्पण का प्रमाण है।
पारिवारिक कला विरासत
प्रियेन्द्र कुमावत की कला यात्रा में उनके परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उनके पिता स्वर्गीय सत्यानारायण कुमावत स्वयं राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिप्राप्त कलाकार रहे थे। पारिवारिक कला विरासत और बचपन से मिला मार्गदर्शन प्रियेन्द्र की रचनाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। परंपरा और आधुनिक दृष्टिकोण का संतुलन उनकी कला की पहचान बन चुका है।
क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल
state level art selection में चयन की खबर मिलते ही थाँवला सहित आसपास के क्षेत्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। कला प्रेमियों, युवाओं, शिक्षकों और समाज के गणमान्य नागरिकों ने प्रियेन्द्र को शुभकामनाएं दीं। सभी ने उम्मीद जताई कि वे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर क्षेत्र का नाम और ऊंचा करेंगे।
युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा
प्रियेन्द्र कुमावत की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि निरंतर मेहनत, सच्ची लगन और पारिवारिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने से किसी भी मंच पर पहचान बनाई जा सकती है। state level art selection में उनका चयन थाँवला की कला पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला कदम है।
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