उदयपुर, संवाददाता — अभिषेक धींग
कभी-कभी ज़िंदगी सबसे बड़ी जीत को भी सबसे गहरे दुख में बदल देती है। उदयपुर जिले के कानोड़ कस्बे में रहने वाली रीमी कोठारी के लिए सोमवार का दिन ऐसा ही था — जिस दिन उसने अपने जीवन की सबसे बड़ी सफलता हासिल की, उसी दिन उसके पिता हमेशा के लिए खामोश हो गए।रीमी के पिता राहुल कोठारी पेशे से व्यवसायी थे और अपनी बेटी की पढ़ाई को लेकर हमेशा सजग रहते थे। उन्होंने हमेशा यही सपना देखा था कि उनकी बेटी एक दिन चार्टर्ड अकाउंटेंट बने।लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।रविवार देर रात राहुल कोठारी को हार्ट अटैक आया और अस्पताल ले जाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। परिवार सदमे में था — और अगले ही दिन, जब उनकी चिता जल रही थी, तभी रीमी का CA Final Exam Result जारी हुआ।

रिजल्ट आया और पिता जा चुके थे…
इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) की ओर से सोमवार को घोषित परिणाम में रीमी कोठारी ने ऑल इंडिया 31वीं रैंक और उदयपुर जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया।यह वही पल था जिसका सपना उसके पिता ने देखा था — लेकिन इस बार तालियां नहीं बजीं, घर में सन्नाटा था।रीमी ने जब रिजल्ट देखा तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उसने बस धीरे से कहा —“पापा, मैं सीए बन गई… सुन रहे हो ना…”
खुशी का पल मातम में बदल गया
परिवार और परिचितों के लिए यह खबर एक साथ गर्व और ग़म दोनों लेकर आई। जहां एक ओर रीमी की मेहनत ने कानोड़ का नाम रोशन किया, वहीं दूसरी ओर पिता की अनुपस्थिति ने उस पल को भावनात्मक बना दिया।घर में पिता की तस्वीर के सामने रीमी ने अपनी सफलता की खबर साझा की — फूलों से नहीं, आंसुओं से।परिजनों ने कहा कि राहुल कोठारी हमेशा अपनी बेटी की पढ़ाई को लेकर गर्व महसूस करते थे। वे हर परीक्षा के परिणाम से पहले उसकी हौसलाअफजाई करते थे।
रीमी की सफलता बनी पूरे शहर के लिए प्रेरणा
रीमी ने सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई में कोई समझौता नहीं किया। उसने कहा —“पापा ने हमेशा कहा था कि मेहनत का फल एक दिन जरूर मिलता है। लेकिन मैंने नहीं सोचा था कि वो दिन बिना पापा के आएगा…”उसकी सफलता ने न केवल उदयपुर जिले बल्कि पूरे राजस्थान में भावनात्मक चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने रीमी की कहानी साझा करते हुए लिखा —“यह सफलता नहीं, पिता के सपने की पूर्ति है।”
ICAI परिणाम से झलका राजस्थान का गौरव
आईसीएआई द्वारा जारी परिणामों में इस वर्ष राजस्थान के कई विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।लेकिन कानोड़ की रीमी कोठारी का परिणाम सबसे अधिक चर्चा में रहा, क्योंकि यह केवल परीक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि एक पिता की अधूरी खुशी का प्रतीक बन गया।रीमी कोठारी की कहानी सिर्फ़ एक रैंक या सफलता की नहीं, बल्कि संवेदना, संघर्ष और सपनों की कीमत की कहानी है।उसने साबित किया कि पिता भले ही शारीरिक रूप से न रहें, लेकिन उनके सपने और आशीर्वाद हर सफलता के साथ जीवित रहते हैं।
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