इस्लामाबाद | पाकिस्तान ने सोमवार देर रात अफगानिस्तान के खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों में एयरस्ट्राइक की, जिसमें सबसे बड़ा हमला खोस्त में हुआ। खोस्त के मुगलगई इलाके में पाकिस्तानी विमानों ने आधी रात करीब 12 बजे एक घर को निशाना बनाया, जिसमें 10 आम नागरिकों की दर्दनाक मौत हो गई। मरने वालों में 9 बच्चे और एक महिला शामिल हैं। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने घटना की पुष्टि की और इसे पाकिस्तान द्वारा हालिया युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया।
तालिबान का आरोप—विमानों ने घर को बनाया निशाना, अन्य प्रांतों में भी घायल
तालिबान ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से की गई बमबारी पूरी तरह से आम नागरिकों को टारगेट करती दिख रही है। कुनार और पक्तिका प्रांतों में भी पाकिस्तान की ओर से हमले और जमीनी छापेमारी की रिपोर्ट है, जिसमें चार नागरिक घायल बताए जा रहे हैं। तालिबान प्रशासन ने इसे “सीजफायर तोड़ने की खुली कार्रवाई” करार दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर ध्यान देने की अपील की है। इस हमले पर पाकिस्तान की सेना और विदेश मंत्रालय ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पेशावर में आत्मघाती हमला, 6 की मौत—पाकिस्तान खुद भी गहरे सुरक्षा संकट में
पाकिस्तान में एयरस्ट्राइक के कुछ घंटे पहले ही पेशावर में फ्रंटियर कांस्टेबुलरी मुख्यालय पर एक आत्मघाती हमला हुआ। यह मुख्यालय सैन्य कैंट क्षेत्र के पास स्थित है और सख्त सुरक्षा में माना जाता है। हमले में 6 लोगों की मौत हुई, जिनमें 3 कमांडो और 3 हमलावर शामिल थे। शुरुआती जांच में पता चला है कि हमलावर चादर ओढ़कर प्रवेश बिंदु तक पहुंचा और खुद को उड़ा लिया। पाकिस्तान के कई शहरों में हाल के दिनों में हमले बढ़े हैं, जिनका आरोप पाकिस्तान सरकार बार-बार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर लगाती है।

तनाव लगातार बढ़ रहा—पिछले महीने भी पाकिस्तान ने काबुल में गिराए थे बम
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कुछ महीनों में तनाव लगातार बढ़ता गया है। अक्टूबर 2025 में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हुई थी। बाद में दोहा में युद्धविराम समझौता हुआ, लेकिन तुर्किये में हुई शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान TTP को पनाह दे रहा है और वे पाकिस्तानी जमीन पर हमले कर रहे हैं। काबुल इन आरोपों को खारिज करता है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि तालिबान सरकार TTP पर कार्रवाई करने से हिचकती है ताकि उसके भीतर बगावत न हो।
डूरंड लाइन का विवाद और लंबे समय से चल रहा अविश्वास
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन विवाद दशकों पुराना है। ब्रिटिश काल में खींची गई इस सीमा रेखा को दोनों तरफ के कई समुदाय कभी स्वीकार नहीं करते। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद सीमा तनाव और बढ़ा है। दोनों देश एक-दूसरे पर समय-समय पर हमले कराने या आतंकियों को शरण देने का आरोप लगाते रहते हैं। लगातार हो रहे हमले और एयरस्ट्राइक इस क्षेत्र में अस्थिरता और अविश्वास को और बढ़ा रहे हैं।






