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गौ लाइफ

गौ लाइफ तकनीक 2026: शिव (बाड़मेर) में किसानों को प्राकृतिक व जैविक खेती से आय बढ़ाने का मिला नया रास्ता

बाड़मेर, संवाददाता: जशवंत सिंह राठौड़

 

शिव उपखंड के बाबा गरीबनाथ एफपीओ में आयोजित कार्यक्रम ने गौ लाइफ तकनीक को लेकर किसानों और पशुपालकों के बीच नई जागरूकता पैदा की है। इस जानकारी सत्र में प्राकृतिक और जैविक खेती की आधुनिक विधियों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिससे क्षेत्र के किसान खेती को अधिक लाभकारी बना सकें।

 

बाबा गरीबनाथ एफपीओ में हुआ आयोजन

यह महत्वपूर्ण जानकारी सत्र बाबा गरीबनाथ किसान उत्पादक संगठन (FPO) के तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिव उपखंड सहित आसपास के गांवों से आए किसान और पशुपालक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

 

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य

इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, खेती की लागत कम करना और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा। गौ लाइफ तकनीक के माध्यम से रासायनिक खेती से हटकर प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाने पर जोर दिया गया।

 

गौ लाइफ तकनीक क्या है?

विशेषज्ञों ने बताया कि गौ लाइफ तकनीक का आधार गाय और उसके प्राकृतिक उत्पाद हैं। इसमें गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी से तैयार जैविक घोल और खाद का उपयोग किया जाता है, जो मिट्टी और फसलों दोनों के लिए लाभकारी होते हैं।

 

रासायनिक खेती से मुक्ति का विकल्प

गौ लाइफ तकनीक अपनाने से रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होती है। इससे न केवल खेती की लागत घटती है, बल्कि मिट्टी की सेहत भी लंबे समय तक बनी रहती है।

 

जैविक घोल और खाद की भूमिका

विशेषज्ञों ने बताया कि गाय आधारित जैविक घोल मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसलें रोगों के प्रति अधिक मजबूत बनती हैं।

 

जीवामृत की उपयोगिता

जीवामृत एक प्राकृतिक जैविक घोल है, जो गोबर और गोमूत्र से तैयार किया जाता है। गौ लाइफ तकनीक के तहत इसका नियमित उपयोग करने से मिट्टी की संरचना में सुधार होता है और फसल की वृद्धि बेहतर होती है।

 

घन जीवामृत और बीजामृत

घन जीवामृत ठोस रूप में उपयोग किया जाता है, जबकि बीजामृत बीज उपचार के लिए बेहद उपयोगी है। इससे बीज जनित रोगों से बचाव होता है और अंकुरण क्षमता बढ़ती है।

 

गौ आधारित कीट नियंत्रण विधियां

विशेषज्ञों ने गौ आधारित प्राकृतिक कीट नियंत्रण विधियों की भी जानकारी दी। इन तरीकों से कीटनाशकों का प्रयोग कम होता है और फसलों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।

 

जल धारण क्षमता में सुधार

गौ लाइफ तकनीक अपनाने से मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है। इससे कम सिंचाई में भी फसल अच्छी होती है, जो विशेष रूप से शुष्क क्षेत्र बाड़मेर के लिए लाभकारी है।

 

किसानों की आय बढ़ाने में सहायक

उत्पादन लागत घटने और फसल की गुणवत्ता बढ़ने से किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं। इससे कुल मिलाकर किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है।

 

किसानों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और प्राकृतिक खेती से जुड़े सवाल पूछे। कई किसानों ने बताया कि गौ आधारित खेती अपनाने से उन्हें सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

 

एफपीओ की सराहनीय पहल

एफपीओ के प्रतिनिधि गिरधर सिंह कोटड़ा ने बताया कि भविष्य में भी गौ लाइफ तकनीक पर इस तरह के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे।

 

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम

प्राकृतिक और जैविक खेती न केवल किसानों के लिए लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती है। इससे मिट्टी, जल और हवा प्रदूषण से सुरक्षित रहते हैं।

 

किसानों से की गई अपील

कार्यक्रम के अंत में सभी किसानों से अपील की गई कि वे गौ आधारित खेती अपनाएं और प्राकृतिक कृषि की ओर कदम बढ़ाएं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।

 

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