जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर से सामने आया Hospital Reference Failure Jaipur का यह मामला सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। SMS और JK Lone जैसे बड़े अस्पतालों में इलाज की बजाय मरीजों को रेफरेंस की फाइलों के भरोसे छोड़ दिया जा रहा है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी शिकार बनी एक 6 साल की मासूम बच्ची, जिसे समय पर डॉक्टर देखने तक नहीं पहुंचे।
आग से झुलसी मासूम की दर्दनाक हालत
सांगानेर क्षेत्र की रहने वाली 6 साल की बच्ची 30 दिसंबर की शाम घर में दीया-बत्ती कर रही थी। इसी दौरान जलती हुई माचिस की तीली उसके पजामे पर गिर गई। कुछ ही सेकेंड में आग भड़क गई और बच्ची गंभीर रूप से झुलस गई। परिजन घबराकर उसे तुरंत SMS अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसे बर्न वार्ड में भर्ती किया गया। बच्ची के प्राइवेट पार्ट्स और दोनों जांघें बुरी तरह जल चुकी थीं। दर्द और बुखार से वह लगातार तड़प रही थी।

एसएमएस हॉस्पिटल का शिशु रोग वार्ड
SMS अस्पताल से JK Lone तक इलाज की फाइल
शुरुआती इलाज के बाद बच्ची की हालत और बिगड़ने लगी। उसे तेज बुखार आने लगा। SMS अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने JK Lone अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाने के लिए रेफरेंस लिख दिया। लेकिन यही रेफरेंस आगे चलकर Hospital Reference Failure Jaipur का उदाहरण बन गया।

बच्ची की दोनों जांघें और प्राइवेट पार्ट बुरी तरह से जल गया
2 दिन तक अस्पताल के चक्कर
रेफरेंस मिलने के बाद परिजन फाइल लेकर JK Lone अस्पताल पहुंचे। पहले दिन उन्हें कोई सीनियर डॉक्टर नहीं मिला। दूसरे दिन भी यही स्थिति रही। बच्ची SMS अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती रही, लेकिन JK Lone से कोई डॉक्टर उसे देखने नहीं आया।
5 दिन में भी नहीं आया सीनियर डॉक्टर
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि रेफरेंस लिखे जाने के 5 दिन बाद भी JK Lone अस्पताल का कोई सीनियर बाल रोग विशेषज्ञ बच्ची को देखने नहीं पहुंचा। तीसरे दिन देर शाम एक रेजिडेंट डॉक्टर ने कुछ दवाइयां लिख दीं, लेकिन हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। यह स्थिति साफ तौर पर Hospital Reference Failure Jaipur को दर्शाती है, जहां मरीज सिस्टम में फंसकर रह जाता है।

नियमों में क्या लिखा है
इस पूरे मामले पर SMS अस्पताल के सीनियर प्लास्टिक सर्जन प्रोफेसर डॉ. सुनील श्रीवास्तव ने नियमों की जानकारी दी। उनके अनुसार, अगर कोई मरीज किसी एक वार्ड में भर्ती है और उसे दूसरे विभाग की समस्या है, तो जिस विभाग को रेफरेंस लिखा गया है, उस विभाग का सीनियर डॉक्टर उसी वार्ड में जाकर मरीज को देखेगा। लेकिन इस केस में नियम सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए।
SMS–JK Lone रेफरेंस सिस्टम की सच्चाई
SMS मेडिकल कॉलेज से जुड़े सभी अस्पतालों—SMS, JK Lone, जनाना अस्पताल, महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट और स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट—में रेफरेंस सिस्टम खुद एक बड़ी समस्या बन चुका है। मरीज भर्ती रहता है, रेफरेंस लिखा जाता है, लेकिन न डॉक्टर देखने आता है और न ही इलाज की जिम्मेदारी कोई लेता है। यही वजह है कि Hospital Reference Failure Jaipur अब आम मरीजों की सबसे बड़ी परेशानी बन गया है।
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था
यह मामला केवल एक बच्ची तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े करता है। जब राजधानी जयपुर के बड़े अस्पतालों में यह हाल है, तो छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। सवाल यह है कि क्या सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज मिलेगा या सिर्फ रेफरेंस की फाइल?
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