शाहपुरा (जयपुर)_समाज में नई सोच और नई दिशा की मिसाल बन चुकी जयपुर निवासी रोजी, पहली ट्रांसजेंडर महिला हैं जिन्हें प्रतिष्ठित “आयरन लेडी अवार्ड” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें उनकी कर्मठता, सामाजिक योगदान और महिला सशक्तिकरण के प्रति निरंतर प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।
नई सोच से शुरू हुई नई दिशा
रोजी केवल एक नाम नहीं, बल्कि समाज में परिवर्तन का प्रतीक बन चुकी हैं। उन्होंने “नई सोच नई शक्ति” नामक एक एनजीओ की स्थापना की है, जो ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य कर रहा है। इस संस्था का उद्देश्य है—
ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मान और समान अधिकार दिलाना।
महिलाओं और बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाना।
समाज में भेदभाव की दीवारों को तोड़ना।
रोजी और उनकी टीम जरूरतमंद महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाती हैं। उनके इस प्रयास से कई महिलाएं आज आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं।
संघर्षों से निकली सफलता की कहानी
रोजी का जीवन कभी आसान नहीं रहा। ट्रांसजेंडर होने के कारण समाज से उन्हें कई तरह की मुश्किलों और तानों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।कठिन परिस्थितियों में भी रोजी ने अपने उद्देश्य से समझौता नहीं किया और समाज में अपनी पहचान स्वयं बनाई।उनका कहना है — “अगर हम खुद पर विश्वास रख लें, तो कोई भी बाधा हमें रोक नहीं सकती।”आज उनकी यही दृढ़ता उन्हें समाज की “आयरन लेडी” बना चुकी है।
अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सम्मान
हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय समरसता मंच और इंडो-नेपाल समरसता संगठन के संयुक्त तत्वावधान में जयपुर के रोटरी भवन सभागार में “वैश्विक शांति समरसता सम्मेलन एवं विचार प्रस्तुति” का आयोजन किया गया।यह आयोजन भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती और भारत रत्न श्रीमती इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि के उपलक्ष में संपन्न हुआ।इस सम्मेलन में 25 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मंच पर संयुक्त राष्ट्र संघ के ध्वज और सभी राष्ट्रध्वजों का तिलक लगाकर नागरिक अभिनंदन किया गया।इसी अवसर पर रोजी को उनके सामाजिक कार्यों के लिए “आयरन लेडी अवार्ड” से सम्मानित किया गया।
समाज के लिए प्रेरणा बनीं रोजी
रोजी की उपलब्धि न केवल ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित किया कि किसी की पहचान उसके सपनों या क्षमताओं को सीमित नहीं कर सकती।उनके एनजीओ के माध्यम से कई युवतियाँ शिक्षा और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं।रोजी का लक्ष्य है कि आने वाले समय में ट्रांसजेंडर और महिलाएँ समाज में सम्मान और समानता के साथ जीवन जी सकें। वह कहती हैं —“समाज में बदलाव शब्दों से नहीं, कर्म से आता है। अगर हम खुद पहल करेंगे, तो बदलाव खुद-ब-खुद शुरू हो जाएगा।”“आयरन लेडी अवार्ड” प्राप्त कर रोजी ने यह साबित कर दिया कि सच्ची शक्ति लिंग या पहचान में नहीं, बल्कि कर्मठता, साहस और समाज के लिए समर्पण में है।उनकी कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जीवन में कठिनाइयों से जूझते हुए भी आगे बढ़ना चाहता है।
संवाददाता _विजयपाल सैनी
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