बारां| संवाददाता: पवन कुमार शर्मा
कोटा रोड स्थित रिद्धिका कॉलोनी में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया जब समरानियां गांव के एक ही परिवार के चार लोग अचानक पानी की टंकी पर चढ़ गए। जमीन विवाद में न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए दो महिलाओं और दो पुरुषों ने करीब 60 फीट ऊंची टंकी पर चढ़कर विरोध जताया। देखते ही देखते क्षेत्र में भीड़ जमा हो गई और हालात तनावपूर्ण बन गए।
सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और टंकी पर चढ़े लोगों से बातचीत शुरू की। पुलिस लगातार उन्हें नीचे उतरने के लिए समझाइश दे रही है, लेकिन परिवार का कहना है कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जाता, वे नीचे नहीं आएंगे।
पहले भी चढ़ चुके हैं टंकी पर
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब इस परिवार ने ऐसा कदम उठाया है। लगभग एक पखवाड़ा पहले भी ये लोग इसी टंकी पर चढ़कर विरोध जता चुके हैं। परिवार का कहना है कि जमीन विवाद में उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है और किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं हो रही।
परिजनों ने बताया कि मामले में कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही। इसी के चलते उन्होंने मजबूरी में यह कदम उठाया। फिलहाल चारों लोग टंकी के ऊपर बैठकर नारेबाजी कर रहे हैं और पुलिस उनकी सुरक्षा के मद्देनज़र टंकी के नीचे मौजूद है।
पुलिस कर रही लगातार बातचीत
कोतवाली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है। टंकी पर चढ़े लोगों से लगातार संवाद बनाया जा रहा है ताकि बिना किसी अनहोनी के उन्हें नीचे उतारा जा सके। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि उनकी शिकायतों की सुनवाई करवाने के लिए संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय हो गया है और मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के प्रयास जारी हैं। पुलिस का यह भी कहना है कि टंकी की ऊंचाई काफी अधिक है, इसलिए किसी भी तरह की जल्दबाजी खतरनाक हो सकती है।
लोगों में भी चिंता का माहौल
घटना के बाद आस-पास के लोगों में चिंता का माहौल है। कॉलोनी में मौजूद नागरिकों का कहना है कि इस तरह टंकी पर चढ़कर विरोध जताना बेहद जोखिम भरा है। वहीं परिवार का दावा है कि वे थक चुके हैं और न्याय के लिए ऐसा कदम उठाने को मजबूर हुए।
जमीन विवाद का समाधान जरूरी
यह घटना एक बार फिर बताती है कि जमीन विवाद आम लोगों के लिए कितनी बड़ी समस्या बन चुके हैं। प्रशासन और पुलिस के लिए चुनौती यह है कि ऐसे मामलों में समय पर हस्तक्षेप कर समाधान निकाला जाए, ताकि लोग इस तरह के खतरनाक कदम न उठाएं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की कोशिश है कि बातचीत के माध्यम से स्थिति को सामान्य किया जाए और परिवार के सदस्यों को सुरक्षित नीचे उतारा जा सके।





