ePaper
690cc3ecab4b9 rajasthan innocent child burnt with hot iron rods 065100376 16x9 1

भीलवाड़ा में 9 महीने के मासूम को निमोनिया के इलाज के नाम पर गर्म सलाखों से दागा, अंधविश्वास ने ली मासूमियत की कीमत

भीलवाड़ा

 

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां 9 महीने के मासूम बच्चे को निमोनिया के इलाज के नाम पर गर्म सलाखों से दाग दिया गया।मासूम को सांस लेने में दिक्कत थी, लेकिन परिवार ने डॉक्टर के पास ले जाने की बजाय एक तांत्रिक महिला की सलाह पर ऐसा अमानवीय कदम उठा लिया।यह घटना फिर साबित करती है कि आज भी ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं, जहां इलाज की जगह तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक को तरजीह दी जाती है।

 

 क्या है पूरा मामला?

 

घटना भीलवाड़ा जिले के बनेड़ा क्षेत्र की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, 9 महीने का बच्चा बीते कई दिनों से बीमार था। उसे तेज खांसी और सांस लेने में परेशानी थी।परिजनों ने गांव की एक स्थानीय तांत्रिक महिला को बुलाया, जिसने कहा कि बच्चे के शरीर में “बुरी आत्मा” का असर है और गर्म सलाखों से दागने से यह आत्मा निकल जाएगी।अंधविश्वास में अंधे परिजनों ने महिला की बात पर भरोसा कर लिया और बच्चे को गर्म लोहे की छड़ों से दाग दिया।

 

 हालत नाजुक, जिला अस्पताल में भर्ती

 

कुछ ही देर बाद बच्चा बुरी तरह झुलस गया और उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। जब उसकी हालत गंभीर हुई तो परिवार उसे भीलवाड़ा के जिला अस्पताल लेकर पहुंचा।डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे के शरीर पर पेट और सीने में जलने के कई निशान हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।फिलहाल बच्चे का इलाज जारी है और डॉक्टरों की टीम उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है।

 

 पुलिस ने दर्ज किया मामला, तांत्रिक महिला हिरासत में

 

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।भीलवाड़ा पुलिस ने अंधविश्वास फैलाने वाली महिला को हिरासत में लिया है।पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि परिवार ने “इलाज के नाम पर झाड़-फूंक” के बहकावे में आकर यह कदम उठाया।पुलिस ने आईपीसी की धारा 324 (जानबूझकर चोट पहुंचाने) और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

 

 अंधविश्वास से दूर रहने की सलाह

 

स्थानीय सामाजिक संगठनों और डॉक्टरों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है।भीलवाड़ा के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश शर्मा ने कहा —निमोनिया जैसी बीमारियां इलाज योग्य हैं। लेकिन अंधविश्वास और गलत परंपराओं की वजह से कई बार बच्चों की जान खतरे में पड़ जाती है। सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में और अधिक जागरूकता फैलानी चाहिए।”

 

 समाज के लिए सबक

 

यह घटना सिर्फ एक परिवार की गलती नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त अज्ञानता और शिक्षा की कमी का परिणाम है।आज भी कई गांवों में बीमारी को जादू-टोना या आत्मा का असर मानकर झाड़-फूंक का सहारा लिया जाता है।जरूरत है कि सरकार, डॉक्टर और समाज मिलकर इस सोच को बदलें, ताकि भविष्य में कोई और बच्चा अंधविश्वास का शिकार न बने।

 

 प्रशासन हुआ सक्रिय

 

जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास विरोधी जागरूकता अभियान चलाया जाए।साथ ही, मेडिकल टीम को गांवों में भेजा जा रहा है ताकि लोगों को बताया जा सके कि बीमारियों का इलाज केवल डॉक्टर के पास ही संभव है, न कि झाड़-फूंक से।

#BhilwaraNews #Rajasthan #Superstition #ChildAbuse #BreakingNews #HealthAwareness #StopSuperstition #ChildSafety #IndianSociety

 

Spread the love

बारां, संवाददाता: जयप्रकाश शर्मा     Mangrol Farmer Training Program का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि, बाजार की समझ और सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना...

Categories

Recent Posts

राज-नीति News

Banner Image
Banner Image
WhatsApp Chat