जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शुक्रवार दोपहर एक बड़ा हादसा टल गया। दोपहर करीब 12:30 बजे दुबई जाने वाली एक नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट CS-GLE टेक्सिंग के दौरान गलत दिशा में चली गई। विमान को रनवे 27 पर जाना था, लेकिन यह गलती से बे-03 की तरफ मुड़ गया। यह दूसरा टैक्सी-वे है, जहां उस समय किसी भी तरह की फ्लाइट मूवमेंट होने पर हादसे की आशंका बढ़ सकती थी।
यह घटना और भी गंभीर इसलिए मानी जा रही है क्योंकि उस समय न तो फॉलो-मी वाहन मौजूद था और न ही एप्रन कंट्रोल की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए। एयरोनॉटिकल सुरक्षा के लिहाज़ से ये दोनों चीजें अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं।
गलत निर्देशों से बढ़ा खतरा
जानकारी के मुताबिक, फ्लाइट को ATC से टैक्सी क्लियरेंस मिलते ही रनवे 27 की ओर बढ़ना था। लेकिन गलत निर्देशों या भ्रम की स्थिति के चलते विमान ने अपना निर्धारित टैक्सी-वे छोड़कर दूसरे टैक्सी-वे (बे-03) की ओर मुड़ने का प्रयास किया। सामान्य रूप से नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट्स को ब्लॉक से रनवे तक पहुंचाने के लिए फॉलो-मी वाहन की गाइडेंस अनिवार्य होती है। लेकिन उस समय ऐसा वाहन उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते विमान गलत दिशा में कुछ देर तक खड़ा रहा।
फॉलो-मी वाहन के पहुँचते ही स्थिति नियंत्रण में आई
घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत फॉलो-मी वाहन भेजा गया। वाहन के वहां पहुंचने के बाद एयरक्राफ्ट को सही टैक्सी-वे पर लाया गया। गाइडेंस के साथ विमान को रनवे तक सुरक्षित पहुंचाया गया और इसके बाद उसने सामान्य प्रक्रिया के तहत टेकऑफ किया। सबसे राहत की बात यह रही कि जिस समय विमान गलत दिशा में गया, उस दौरान बे-03 पर कोई दूसरी फ्लाइट या ग्राउंड मूवमेंट नहीं हो रहा था। अन्यथा परिणाम गंभीर हो सकते थे।

एयरपोर्ट प्रशासन सवालों के घेरे में
इस पूरे घटनाक्रम के बाद ATC और एप्रन कंट्रोल की लापरवाही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एयरपोर्ट पर रनवे और ग्राउंड मूवमेंट से जुड़े गलत निर्देश कभी-कभी घातक साबित हो सकते हैं। यही कारण है कि इस घटना ने एयरपोर्ट सुरक्षा प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एयरपोर्ट प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार जल्द ही इस घटना की आंतरिक जांच की जा सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गलती किस स्तर पर हुई।





