नई दिल्ली
नई दिल्ली — सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद में हुए प्लेन क्रैश मामले में शुक्रवार को सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि “देश में कोई नहीं मानता कि यह हादसा पायलट की गलती थी।” इस बयान के साथ अदालत ने केंद्र सरकार और DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) से विस्तृत जवाब तलब किया है।यह मामला उस पायलट के पिता द्वारा दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिन्होंने हादसे में अपने बेटे को खो दिया था।
कोर्ट ने पूछा – जांच रिपोर्ट में पारदर्शिता क्यों नहीं?
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि दुर्घटना की जांच रिपोर्ट में पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है। कोर्ट ने पूछा कि अगर यह वास्तव में तकनीकी खराबी या मैकेनिकल फॉल्ट था, तो पायलट को दोषी क्यों ठहराया गया?जस्टिस की बेंच ने कहा,देश में कोई यह नहीं मानता कि यह केवल पायलट की गलती थी। DGCA को यह बताना होगा कि जांच किस तरह की गई और किन तकनीकी विशेषज्ञों की राय ली गई।”कोर्ट ने केंद्र और DGCA से कहा कि वे चार हफ्तों के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करें और हादसे की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर भी विचार करें।
पायलट के पिता की याचिका ने उठाए गंभीर सवाल
यह याचिका दिवंगत पायलट के पिता द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें उन्होंने कहा कि उनके बेटे को बिना सबूत के दोषी ठहराया गया। याचिका में दावा किया गया कि विमान में पहले से ही तकनीकी खराबी थी और कई बार DGCA को इसकी जानकारी दी गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।याचिकाकर्ता ने मांग की कि जांच को स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक आयोग के हवाले किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
DGCA और केंद्र सरकार पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और DGCA दोनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि “जब भी कोई हादसा होता है, तो रिपोर्टें पायलट की गलती बताकर खत्म कर दी जाती हैं। यह रवैया बदलना होगा।”कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा मानकों और तकनीकी जांच में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अगर जांच में कोई त्रुटि मिली, तो DGCA की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
तकनीकी खराबी या मानवीय भूल – अब बड़ा सवाल
अहमदाबाद में यह हादसा उस वक्त हुआ था जब प्रशिक्षण के दौरान विमान ने रनवे से उड़ान भरी और कुछ ही क्षण बाद गिरकर आग की लपटों में घिर गया। हादसे में प्रशिक्षक पायलट और एक छात्र पायलट की मौत हो गई थी।प्रारंभिक जांच में DGCA ने “पायलट की त्रुटि” को कारण बताया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद मामला नया मोड़ ले चुका है।
विमानन क्षेत्र में जवाबदेही की मांग तेज
इस घटना के बाद से विमानन क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में एविएशन हादसों की जांच अक्सर तकनीकी स्तर पर नहीं होती और दोष तय करने की प्रक्रिया एकतरफा होती है।सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप अब न सिर्फ पीड़ित परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, बल्कि भारत में विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है।
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