विराटनगर (जयपुर) _संवाददाता (मामराज मीणा)
जयपुर जिले के विराटनगर उपखंड के नारायणपुर क्षेत्र के कोलाहेड़ा गांव में स्थित राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मंगलवार को एक डॉक्टर की शर्मनाक करतूत उजागर हुई।एक महिला मरीज ने डॉक्टर पर छेड़छाड़ और अश्लील हरकत का गंभीर आरोप लगाया, जिससे पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया।
महिला मरीज ने बताया—“जांच के बहाने किया गलत व्यवहार”
पीड़िता ने बताया कि 30 अक्टूबर को वह अपनी सासु मां के साथ इलाज के लिए पीएचसी कोलाहेड़ा पहुंची थी।इलाज के दौरान डॉक्टर ने उसे “जांच के बहाने” अंदर कमरे में बुलाया और उसके साथ अशोभनीय हरकतें कीं।महिला ने कहा कि जब उसने विरोध किया तो डॉक्टर ने उसे डराने की कोशिश की।घटना के बाद डॉक्टर तीन दिन तक अस्पताल से गायब रहा, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया।
ग्रामीणों का हंगामा, अस्पताल परिसर में नारेबाजी
सोमवार को जब आरोपी डॉक्टर ड्यूटी पर लौटा, तो ग्रामीणों को इसकी खबर लगते ही अस्पताल परिसर में भारी भीड़ एकत्र हो गई।ग्रामीणों ने डॉक्टर के खिलाफ नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दियास्थिति को बिगड़ता देख प्रशासन और पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा।
पुलिस और बीसीएमओ पहुंचे मौके पर
सूचना मिलने पर बानसूर बीसीएमओ दीपेन्द्र सिंह शेखावत और थाना प्रभारी रोहिताश कुमार जाप्ते सहित मौके पर पहुंचे।उन्होंने ग्रामीणों को समझाकर स्थिति को शांत कराया और आरोपी डॉक्टर को भीड़ से निकालकर सुरक्षित थाने तक पहुंचाया।बीसीएमओ दीपेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि“घटना की सूचना उच्च अधिकारियों को दी गई है, और आरोपी डॉक्टर राजकुमार को तत्काल प्रभाव से एपीओ (प्रशासनिक स्थानांतरण) कर दिया गया है।”उन्हें अब कोटपुतली सीएमएचओ कार्यालय में लगाया गया है।
पुलिस जांच जारी, अभी तक मामला दर्ज नहीं
थाना अधिकारी ने बताया कि फिलहाल इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, लेकिन पुलिस ने पीड़िता और ग्रामीणों के बयान लेकर प्राथमिक जांच शुरू कर दी है।अधिकारियों ने कहा कि यदि पीड़िता लिखित शिकायत देती है तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों में आक्रोश और नाराज़गी
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।लोगों ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित होना चाहिए।ग्रामीणों की मांग है कि आरोपी डॉक्टर को निलंबित कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।विराटनगर क्षेत्र की यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में नैतिकता और जिम्मेदारी की कमी को उजागर करती है।जहां मरीज इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, वहीं ऐसे कृत्य जनता का भरोसा तोड़ देते हैं।प्रशासन ने फिलहाल डॉक्टर को एपीओ कर दिया है, लेकिन ग्रामीणों की नजर अब आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।





