संवाददाता : तेजपाल सिंह बग्गा
कोटा जिले के इटावा थाना क्षेत्र में एक क्रेशर मशीन हादसा उस समय बड़ा रूप ले गया जब काली सिंध ढिबरी गांव स्थित गिट्टी क्रेशर पर काम कर रहे मजदूर युवक की मशीन में फंसने से दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ इलाके में सनसनी फैलाने वाली थी बल्कि मजदूर सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठाती है।
मजदूर चंदन की मौत कैसे हुई?
सोमवार दोपहर करीब 12 बजे मृतक चंदन पुत्र बाली राम, जो मध्यप्रदेश का रहने वाला था, रोज़ की तरह काली सिंध ढिबरी गांव में स्थित क्रेशर प्लांट पर काम कर रहा था। अचानक काम के दौरान वह क्रेशर मशीन की चपेट में आ गया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना तेज था कि किसी को प्रतिक्रिया देने का मौका तक नहीं मिला। साथी मजदूरों ने तुरंत उसे मशीन से निकालकर प्राथमिक सहायता देने की कोशिश की, लेकिन उसकी हालत गंभीर थी।
परिजनों का आरोप और दर्द
मृतक चंदन के परिजनों ने बताया कि वह पिछले काफी समय से वहां मजदूरी कर रहा था। परिवार ने यह भी कहा कि चंदन रोज़ीरोटी की तलाश में मध्यप्रदेश से राजस्थान आया था, लेकिन क्रेशर मशीन हादसा उसके जीवन का आखिरी दिन साबित हुआ।परिवार का कहना है कि क्रेशर साइट पर सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी थी और काम करवाने वाले लोग सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर नहीं थे। हर तरफ मातम और शोक की स्थिति है।
अस्पताल में क्या हुआ?
घायल चंदन को तुरंत कोटा के एमबीएस अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। लेकिन मशीन से हुए गंभीर घावों के कारण चंदन ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।अस्पताल प्रशासन ने शव को मोर्चरी में रखवा दिया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
इटावा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और क्रेशर मशीन हादसे की जांच शुरू कर दी है।पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का पंचनामा तैयार कर शव को मोर्चरी में रखवाया है।शुरुआती जांच में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है, लेकिन अंतिम तथ्य रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे। कई मजदूरों ने भी बताया कि मशीनें अक्सर बिना उचित सुरक्षा जाँच के चलती रहती हैं।
क्रेशर मशीन हादसे क्यों बढ़ रहे हैं?
हाल के वर्षों में क्रेशर मशीन हादसा से जुड़े मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसके तीन मुख्य कारण अक्सर सामने आते हैं—
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मशीनों की खराब स्थिति या नियमित सर्विसिंग का अभाव
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सुरक्षा उपकरणों (Safety Gear) की कमी
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मजदूरों को उचित ट्रेनिंग न देना
ऐसी परिस्थितियों में काम करने वाले श्रमिक हमेशा ख़तरे के बीच रहते हैं।
मजदूर सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल
यह घटना मजदूर सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाती है।
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क्या क्रेशर प्लांट में सुरक्षा मानक लागू किए जा रहे हैं?
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क्या मजदूरों को जोखिम भरे काम के लिए सुरक्षा उपकरण दिए जा रहे हैं?
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मशीनों की नियमित जाँच कौन करता है?
यह हादसा प्रशासन और क्रेशर प्लांट ऑपरेटरों के लिए चेतावनी है।
कि मजदूरों की जान कोई सस्ता संसाधन नहीं है।इटावा में हुए क्रेशर मशीन हादसा ने एक परिवार से उसके बेटे को छीन लिया और मजदूर सुरक्षा की वास्तविकता को उजागर कर दिया। पुलिस जांच कर रही है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि मजदूरों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए ताकि ऐसी दर्दनाक घटनाएं भविष्य में न हों।
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