कोटा, संवाददाता: तेजपाल सिंह बग्गा
मनरेगा योजना देश के ग्रामीण रोजगार की रीढ़ मानी जाती है। हाल ही में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की योजनाएं और नीतियां मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश को बल दे रही हैं। कांग्रेस के अनुसार यह सिर्फ एक योजना को बंद करने का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों ग्रामीणों की आजीविका पर बड़ा संकट है। यही कारण है कि कोटा में कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन कर इसे गंभीरता से उजागर किया।
कोटा कलेक्ट्रेट में कांग्रेस का जोरदार धरना
सोमवार दोपहर 12 बजे कोटा कलेक्ट्रेट परिसर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराया। नारेबाजी और हाथों में तख्तियों के साथ प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार के खिलाफ अपने गुस्से को जाहिर कर रहे थे। धरना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण रोजगार के संरक्षण और मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश के विरोध में सार्वजनिक ध्यान आकर्षित करना था।
शहर और देहात कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भागीदारी
धरने का नेतृत्व कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजन, शहर जिला अध्यक्ष राखी गौतम, और देहात जिला अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने किया। नेताओं ने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन और आत्मसम्मान की सुरक्षा भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस योजना को कमजोर करने का मतलब ग्रामीण भारत के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना है।
नेताओं के तीखे बयानों में सरकार पर आरोप
धरने को संबोधित करते हुए प्रहलाद गुंजन ने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांवों में काम के दिन घटाए जा रहे हैं, मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा और योजना के बजट में कटौती की जा रही है। नेताओं ने चेताया कि यह सिर्फ ग्रामीणों की आजीविका पर हमला नहीं, बल्कि पूरे देश के गरीब वर्ग को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।
ग्रामीण रोजगार और मनरेगा का महत्व
मनरेगा योजना के तहत ग्रामीणों को न्यूनतम रोजगार और वेतन की गारंटी मिलती है। योजना से न केवल बेरोजगारी कम हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश के कारण ग्रामीण मजबूर होकर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर होंगे, जिससे सामाजिक और आर्थिक असंतुलन पैदा होगा।
भाजपा सरकार के कदमों की आलोचना
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों के सहारे योजनाओं को कमजोर कर रही है। बजट कटौती, तकनीकी अड़चनें और भुगतान में देरी जैसी नीतियां सीधे तौर पर योजना को खत्म करने की दिशा में हैं। धरना प्रदर्शन में ग्रामीण और मजदूर वर्ग ने भी अपनी नाराजगी जताई और योजना की सुरक्षा की मांग की।
कांग्रेस का आंदोलन जारी रखने का ऐलान
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश पूरी तरह रुक नहीं जाती, उनका संघर्ष जारी रहेगा। नेताओं ने चेताया कि आंदोलन को जिला स्तर से राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक बढ़ाया जाएगा। उनका कहना था कि सरकार की उदासीनता ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भविष्य की राजनीति और ग्रामीण प्रतिक्रिया
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मनरेगा जैसे रोजगार योजनाओं को लेकर उठे विरोध प्रदर्शन का असर ग्रामीण वोट बैंक पर पड़ेगा। कोटा कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन को प्रभावित करने वाला मुद्दा है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस प्रदर्शन और विरोध के बाद नीति में बदलाव करती है या नहीं।
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