बारां, संवाददाता: जयप्रकाश शर्मा
Mangrol Stadium Locked मामला इन दिनों राजस्थान के बारां जिले के मांगरोल कस्बे में चर्चा का विषय बना हुआ है। कस्बे के एकमात्र खेल स्टेडियम पर पिछले कई महीनों से ताले लटके हुए हैं, जिससे स्थानीय खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। हैरानी की बात यह है कि स्टेडियम का हाल ही में कायाकल्प किया गया, लेकिन इसके बावजूद इसे उपयोग के लिए नहीं खोला गया।
स्टेडियम का कायाकल्प, फिर भी ताले
खेल प्रेमियों का कहना है कि Mangrol Stadium Locked होने से यह स्पष्ट हो गया है कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं। सरकार ने खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस स्टेडियम पर लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन निर्माण कार्य अधूरा बताकर इसे बंद रखा गया है। स्थानीय खिलाड़ियों का आरोप है कि अधूरे निर्माण का हवाला देकर महीनों तक स्टेडियम बंद रखना उचित नहीं है। Mangrol Stadium Locked के कारण युवा खिलाड़ियों का अभ्यास और प्रतियोगिताओं की तैयारी प्रभावित हो रही है।
खिलाड़ियों की परेशानी और नाराजगी
Mangrol Stadium Locked होने से खिलाड़ियों को खुले मैदानों या असुरक्षित जगहों पर अभ्यास करना पड़ रहा है। इससे न केवल उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है, बल्कि चोट लगने का खतरा भी बना रहता है। खेल प्रेमी रिंकू सुमन, निक्की पांचाल, महेन्द्र सुमन, हरिओम प्रजापति, धर्मेन्द्र सुमन, राजेन्द्र सुमन सहित अन्य खिलाड़ियों ने Mangrol Stadium Locked पर नाराजगी जताते हुए जल्द ताले खुलवाने की मांग की है।
पहले भी हो चुका है प्रदर्शन
यह पहला मौका नहीं है जब Mangrol Stadium Locked को लेकर आवाज उठी हो। इससे पहले भी खिलाड़ी ताले खुलवाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। खेल प्रेमियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्टेडियम नहीं खोला गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। Mangrol Stadium Locked अब केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
उपेक्षा से बदहाल होता परिसर
Mangrol Stadium Locked रहने के कारण परिसर में झाड़-झंखाड़, बबूल और कचरा फैल गया है। लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण नवनिर्मित ढांचा भी उपेक्षित नजर आने लगा है। खिलाड़ियों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों को इस स्थिति की कोई चिंता नहीं है। Mangrol Stadium Locked रहने से सरकारी धन की भी बर्बादी हो रही है।
मांगरोल की खेल प्रतिभाओं की पहचान
Mangrol Stadium Locked का मुद्दा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मांगरोल क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। बालापुरा गांव की प्रियंका मीणा ने हैंडबॉल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल किया है। नंद गांवड़ी के करणादित्य सिंह ने नेपाल के पोखरा स्टेडियम में आयोजित इंडो-नेपाल यूथ अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप 2025 में भारत की पुरुष कबड्डी टीम से खेलते हुए स्वर्ण पदक जीता है। ऐसे में Mangrol Stadium Locked रहना आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
प्रशासन का पक्ष क्या कहता है
Mangrol Stadium Locked मामले पर पीडब्ल्यूडी मांगरोल के एक्सईएन एस.एन. मीणा ने बताया कि स्टेडियम का कुछ कार्य अभी शेष है, जिसे अगले सप्ताह तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शेष कार्य पूर्ण होते ही स्टेडियम को नगर पालिका को सुपुर्द कर दिया जाएगा। इसके बाद Mangrol Stadium Locked की स्थिति समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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