बलरामपुर | उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में सोमवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। नेपाल से दिल्ली जा रही एक निजी बस को तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मारी, जिसके बाद बस सड़क पर घिसटती हुई करीब 100 मीटर दूर हाईटेंशन लाइन वाले खंभे से जा टकराई। खंभा टूटकर बस पर गिरा और करंट फैलने से बस आग के भीषण गोले में बदल गई। इस दिल दहला देने वाली घटना में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 24 यात्री बुरी तरह झुलस गए। गंभीर रूप से घायलों को बहराइच मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।
बस में कुल 45 यात्री सवार थे, जिनमें से अधिकांश नेपाल के नागरिक थे। हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई यात्रियों ने अपनी जान बचाने के लिए बस की खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर छलांग लगाई। घटना स्थल पर चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें भी पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की।


टक्कर के बाद करंट फैलते ही बस बनी आग का गोला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस सुनौली बॉर्डर से बलरामपुर की ओर बढ़ रही थी, जबकि दूसरी ओर से तेज रफ्तार ट्रक आ रहा था। जैसे ही बस चौराहे के बीच पहुंची, ट्रक ने उसे जबरदस्त удар से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि बस सड़क पर घिसटती हुई एक ट्रांसफॉर्मर और बिजली के खंभे से टकरा गई। हाईटेंशन लाइन टूटकर बस पर गिर गई और करंट फैलते ही आग ने पूरी बस को चपेट में ले लिया। यात्रियों ने बताया कि आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरी बस जलने लगी।
इस दौरान ट्रक में भरे गर्म कपड़ों में भी आग लग गई और ट्रक पलट गया। बाद में पुलिस ने जब ट्रक को सीधा किया, तो नीचे एक झुलसा हुआ शव मिला। पुलिस का अनुमान है कि यह शव ट्रक में सवार व्यक्ति का हो सकता है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
घायल यात्रियों की दर्दनाक आपबीती
हादसे में बचकर निकले कई यात्रियों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि पलभर के लिए किसी को समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या। एक यात्री ने बताया कि आग लगने के बाद बस में हर तरफ धुआं फैल गया और लोग बाहर निकलने के लिए तड़पने लगे। कई यात्रियों को हाईटेंशन लाइन के गिरने की वजह से करंट भी लगा। एक घायल यात्री ने बताया कि वह बस की आखिरी सीट पर बैठा था और खिड़की तोड़कर कूदते ही उसकी जान बची। उसके मुताबिक बस में 60 से अधिक लोग सवार थे, जो नेपाल से दिल्ली और गुरुग्राम की ओर जा रहे थे।
अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी है और कई की हालत गंभीर बनी हुई है। पांच महिलाओं समेत कई यात्री बुरी तरह झुलस गए हैं। उनकी हालत देखते हुए उन्हें बहराइच मेडिकल कॉलेज भेजा गया है।

बस पूरी तरह जलकर राख, 5 घंटे बाद काबू पाई गई आग
मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीमों ने करीब 5 से 6 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। सुबह जब हालात सामान्य हुए तो बस सिर्फ राख के ढेर में तब्दील दिखी। आसपास यात्रियों के जले हुए बैग, कपड़े और सामान बिखरे पड़े थे, जो हादसे की भयावहता को बयान कर रहे थे।
स्थानीय लोगों ने बताया कि जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां अक्सर ऐसी दुर्घटनाएं होती रहती हैं। लोगों ने प्रशासन से चौराहा बनाने और सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग की। उनका कहना है कि डीएसपी कार्यालय और कई सरकारी आवास पास होने के बावजूद यहां ट्रैफिक प्रबंधन बेहद कमजोर है।


एक बड़ा सवाल: सड़क सुरक्षा कितनी मजबूत?
यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। तेज रफ्तार, लापरवाही और सड़क संरचना की कमियों के कारण आए दिन ऐसे हादसे सामने आ रहे हैं। बलरामपुर जैसी सीमा क्षेत्रों से गुजरने वाली बसों में अक्सर भीड़ होती है, और सुरक्षा उपाय कमजोर रहते हैं।
हालांकि प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया था, लेकिन हादसे की गति इतनी तेज थी कि कई लोगों को बचाया नहींa जा सका। यात्रियों की हिम्मत और सूझबूझ ने कई जानें बचाईं, लेकिन तीन परिवारों ने अपने अपनों को हमेशा के लिए खो दिया। यह घटना प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत का बड़ा सबक है।





