जोधपुर,संवाददाता:निर्मल सिंह
राजस्थान की लोक-संस्कृति, रंग, लय और परंपराओं का अनोखा संगम बुधवार शाम उम्मेद स्टेडियम में देखने को मिला, जब पहली बार पर्यटन विभाग की ओर से संभाग स्तरीय भव्य घूमर महोत्सव 2025 का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस विशेष कार्यक्रम ने न केवल जोधपुर बल्कि पूरे मारवाड़ क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को एक बार फिर जीवंत कर दिया।घूमर महोत्सव के लिए इस बार 1900 से अधिक महिलाओं ने ई-रजिस्ट्रेशन कराया था, जो इसकी लोकप्रियता और जनभागीदारी का प्रमाण है। राजस्थानी पारंपरिक परिधानों—लहंगे, ओढ़नी, बंधेज, गोटा-पत्ती और चांदी की ज्वैलरी—में सजी महिलाओं ने पूरे स्टेडियम को लोक-रंगों से सराबोर कर दिया।महिलाओं के कदमों की ताल, घूमर की गोलाई और संगीतकारों के सुर मानो पूरे स्टेडियम में लोक-आभा की रेशमी तरंगें बिखेर रहे थे। आयोजन की परफेक्ट कोरियोग्राफी, अनुशासन और भव्यता ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
घूमर के साथ पारंपरिक प्रॉप्स ने खींचा ध्यान
प्रतिभागियों ने पारंपरिक घूमर को और आकर्षक बनाने के लिए कई प्रॉप्स का इस्तेमाल किया—
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तलवारें
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चरी
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सजावटी घड़े
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राजस्थानी लोक-सामग्री
इन प्रॉप्स के साथ किए गए घूमर प्रदर्शन में राजस्थान की शौर्य, नारी-सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर मेल दिखाई दिया। हर ग्रुप ने अपने अंदाज़ और थीम के अनुसार प्रस्तुतियां दीं, जिनमें कलात्मक सटीकता और लोक-कला की आत्मा जीवंत रूप में छलकी।
महत्वपूर्ण अतिथियों ने बढ़ाया कार्यक्रम का गौरव
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व नरेश गजसिंह ने की।इसके साथ ही शहर विधायक अतुल भंसाली, सूरसागर विधायक देवेंद्र जोशी और प्रसिद्ध सोशल वर्कर रूमा देवी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। उनकी मौजूदगी ने इस आयोजन को एक नई पहचान और प्रोत्साहन दिया।रोटरी क्लब जोधपुर संस्कार ने महोत्सव में विशेष सहयोग प्रदान किया, जिससे आयोजन और भी सुव्यवस्थित और प्रभावी रहा।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को मिला सम्मान
प्रस्तुतियों की गुणवत्ता, पारंपरिकता और समन्वय को देखते हुए विजेताओं का चयन किया गया। इनमें—
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Best Group Jewelry Award – केएन कॉलेज की टीम
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Second Prize – फेमिना वेल्फेयर ग्रुप
दोनों टीमों ने अपने प्रदर्शन में रचनात्मकता, पारंपरिक सौंदर्य और घूमर की वास्तविक आत्मा को शानदार रूप से प्रस्तुत किया।
राजस्थानी स्त्री शक्ति और लोक-संस्कृति का भव्य संगम
घूमर केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि राजस्थान की भावनाओं, संस्कारों और स्त्री सम्मान का प्रतीक है। इस महोत्सव ने यह साबित कर दिया कि परंपराएं आज भी लोगों के दिलों में उतनी ही जीवंत हैं जितनी सदियों पहले थीं।उम्मेद स्टेडियम में हजारों दर्शकों की तालियों के बीच जब महिलाएं घूमर की गोलाई में खो रही थीं, तो ऐसा लग रहा था जैसे पूरा राजस्थान उनके संग झूम उठा हो।जोधपुर का यह पहला संभाग स्तरीय घूमर महोत्सव इतिहास में एक यादगार सांस्कृतिक पर्व के रूप में दर्ज हो गया है। पर्यटन विभाग के इस अनूठे प्रयास ने राजस्थानी लोक-संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम रखा है।
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