Dhirendra Shastri Babri Masjid Controversy हाल ही में तब चर्चा में आ गई जब बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कोलकाता में हुए एक विशाल गीता पाठ कार्यक्रम के दौरान बाबरी मस्जिद विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि भगवान राम पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता और अगर की गई, तो विरोध होना निश्चित है। यह बयान सीधे उस घटना से जुड़ा है जिसमें निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद-शैली की मस्जिद की नींव रखी।
कोलकाता में 5 लाख लोगों का गीता पाठ
कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुए ‘लोक्खो कंठे गीता पाठ’ कार्यक्रम में लगभग 5 लाख लोगों ने एक साथ भगवद गीता का पाठ किया। इस कार्यक्रम ने Dhirendra Shastri Babri Masjid Controversy को और अधिक सुर्खियों में ला दिया क्योंकि यह आयोजन ठीक उस दिन हुआ जब बंगाल में बाबरी-शैली की मस्जिद का शिलान्यास हुआ था।
गीता मनीषी महामंडल के स्वामी ज्ञानानंदजी महाराज के नेतृत्व में हुए इस आयोजन में कई साधु-संत शामिल हुए और इसे आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बताया गया।
विवादित बयान: धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा?
Dhirendra Shastri Babri Masjid Controversy का सबसे बड़ा कारण उनका दिया गया बयान है। उन्होंने साफ कहा—
“हमारे भगवान राम पर टिप्पणी की गई तो ठठरी बांध दी जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि किसी की अपनी धार्मिक आस्था हो सकती है, लेकिन राम मंदिर या सनातन पर अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं होगी।
शास्त्री ने “सनातनी चाहिए, तनातनी नहीं” कहकर सनातन एकता और शांति की अपील भी की।
हुमायूं कबीर और बाबरी मस्जिद की नींव विवाद
इस पूरे Dhirendra Shastri Babri Masjid Controversy की जड़ें निलंबित TMC विधायक हुमायूं कबीर के कदम से जुड़ी हैं।
उन्होंने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की नींव रखी, जिसे लेकर राज्यभर में बहस शुरू हुई।
पार्टी से निलंबित कबीर पहले भी विवादित बयानों के लिए जाने जाते रहे हैं, और इस बार उनका यह कदम फिर राजनीतिक हलचल का केंद्र बना।
कोर्ट में इसे रोकने की याचिका भी दायर हुई, लेकिन हाई कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया।
कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ और धार्मिक संदर्भ
कोलकाता का आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनसमर्थन का एक प्रदर्शन बन गया।
भगवा ध्वज, गीता के श्लोक और मंच पर साधु-संतों की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
कई लोगों ने इसे Dhirendra Shastri Babri Masjid Controversy का प्रतीक बताया, क्योंकि गीता पाठ उसी समय आयोजित हुआ जब बंगाल में मस्जिद का शिलान्यास किया गया था।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और माहौल
बंगाल का राजनीतिक माहौल पहले से संवेदनशील रहा है, ऐसे में Dhirendra Shastri Babri Masjid Controversy ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।
कई नेताओं ने इसे धार्मिक ध्रुवीकरण बताया, वहीं कुछ ने इसे “आस्था की अभिव्यक्ति” कहा।
आयोजन और विवाद, दोनों ने राज्य की राजनीति में नई बहस पैदा कर दी है।
सोशल मीडिया पर चर्चा और प्रभाव
सोशल मीडिया पर Dhirendra Shastri Babri Masjid Controversy तेजी से वायरल हो गई।
हजारों पोस्ट, वीडियो और रील्स वायरल हुए—
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कुछ ने आयोजन की सराहना की
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कुछ ने बयान को विवादित बताया
ट्विटर (X) और यूट्यूब पर #DhirendraShastri, #BabriMasjidFoundation जैसे हैशटैग ट्रेंड में रहे।
Dhirendra Shastri Babri Masjid Controversy केवल एक बयान नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, राजनीतिक परिस्थिति और सामाजिक भावनाओं का एक संगम है।
यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि दोनों पक्षों के समर्थक सक्रिय हैं और माहौल संवेदनशील बना हुआ है।
ऐसे समय में शांति, संवाद और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है।
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