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जयपुर के झालाना में लेपर्ड फ्लोरा का लाइव शिकार: 30 सेकेंड में चीतल को दबोचा, पर्यटकों ने करीब से देखा रोमांच

जयपुर | जयपुर में लेपर्ड देखे जाने की बढ़ती घटनाओं के बीच गुरुवार शाम झालाना लेपर्ड रिजर्व से एक बेहद रोमांचक और चौंकाने वाला वीडियो सामने आया। यहां शिव मंदिर मार्ग पर मौजूद मादा लेपर्ड ‘फ्लोरा’ ने सबके सामने एक मादा चीतल का शिकार कर लिया। इस घटना को पर्यटकों ने महज कुछ मीटर की दूरी से देखा और वीडियो में कैद किया। हैरानी की बात यह रही कि पूरा शिकार सिर्फ 30 सेकेंड में खत्म हो गया।

 

झालाना में मादा लेपर्ड फ्लोर ने पर्यटकों के सामने किया शिकार।

पर्यटकों के सामने हुआ लाइव शिकार

जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त रास्ते के दोनों ओर पर्यटकों से भरी सफारी गाड़ियां खड़ी थीं। सभी लोग सामान्य मूवमेंट देखने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन पल भर में माहौल रोमांच और डर में बदल गया। जैसे ही फ्लोरा झाड़ियों से बाहर निकली और चीतल पर झपटी, पर्यटक पूरी तरह हैरान रह गए। उन्हें अपनी आंखों के सामने इतना नजदीक से लाइव शिकार देखने का अनोखा अनुभव मिला।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, फ्लोरा ने पहले चीतल को बिजली की गति से दबोचा, फिर मजबूत पकड़ के जरिए जमीन पर गिराया। चीतल के पूरी तरह शांत होने से पहले ही फ्लोरा उसे एक सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी करने लगी।

 

फ्लोरा ने शिकार कर चीतल के साथ 8 फीट ऊंची दीवार पर लगाई छलांग।

60–70 किलो का चीतल, 8 फीट दीवार पर छलांग

घटना का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह था कि करीब 60–70 किलो वजनी चीतल को फ्लोरा ने अविश्वसनीय फुर्ती के साथ उठाकर 8 फीट ऊंची दीवार पर छलांग लगाई और जंगल की ओर निकल गई। यह नजारा देखकर पर्यटकों के साथ-साथ वन विभाग की टीम भी दंग रह गई। इस तरह की ताकत और स्पीड जंगल के बड़े शिकारी ही दिखा सकते हैं।

 

लेपर्ड फ्लोरा 30 सेकेंड में चीतल को मारकर अपने शावकों के भोजन का इंतजाम किया।

तीन शावकों के कारण बढ़ गई है फ्लोरा की सक्रियता

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फ्लोरा के ढाई से तीन महीने के तीन शावक हैं। छोटे शावकों की सुरक्षा और भोजन की उपलब्धता के लिए मादा लेपर्ड अक्सर ज्यादा शिकार करती है और अधिक सक्रिय रहती है। इसी वजह से पिछले दो हफ्तों में यह तीसरी बार है जब फ्लोरा को लाइव शिकार करते देखा गया है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि मादा लेपर्ड बच्चों की सुरक्षा के समय अधिक साहसी और क्षेत्र में प्रभुत्व दिखाने वाली हो जाती है। यही कारण है कि फ्लोरा लगातार जंगल से मानव गतिविधि वाले क्षेत्रों की तरफ भी मूवमेंट कर रही है।

 

वन विभाग की टीम ने बढ़ाई निगरानी

घटना की जानकारी मिलते ही रेंज अधिकारी जितेंद्र सिंह शेखावत अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। टीम लगातार फ्लोरा और उसके शावकों की मूवमेंट पर नजर रख रही है, ताकि मंदिर मार्ग जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके। इसके लिए अतिरिक्त पेट्रोलिंग और ट्रैकिंग भी शुरू कर दी गई है।

 

फ्लोरा—‘झालाना की मछली’

फ्लोरा को झालाना की सबसे सफल और ‘सबसे बड़ी मां’ माना जाता है। उसने इसी क्षेत्र में चार पीढ़ियों को जन्म दिया है। रणथंभौर की दिग्गज बाघिन ‘मछली’ की तरह, फ्लोरा भी अपने बच्चों का पालन-पोषण करने, सुरक्षा करने और लगातार शिकार करके उन्हें भोजन देने के लिए जानी जाती है।

इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि जयपुर केवल ऐतिहासिक शहर ही नहीं बल्कि वन्यजीवों का सुरक्षित और सक्रिय घर भी है, जहां इंसान और प्रकृति दोनों का अस्तित्व साथ-साथ चलता है।

 

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