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आज का पंचांग 18 नवंबर: मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष त्रयोदशी, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और नक्षत्र

आज 18 नवंबर 2025 को मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। सुबह 07:12 बजे तक त्रयोदशी रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। मार्गशीर्ष मास को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है और इस महीने में पूजा-पाठ, व्रत और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है।

 

नक्षत्र और योग

आज स्वाति नक्षत्र 31:52 बजे तक रहेगा, जिसे चंद्रमा के प्रभाव वाला अत्यंत शुभ नक्षत्र कहा गया है। आज का प्रमुख योग ‘आयुष्मान’ है, जो 08:07 बजे तक प्रभावी रहेगा। आयुष्मान योग को दीर्घायु, स्वास्थ्य और उन्नति का कारक योग माना जाता है।

 

करण और उनकी अवधि

त्रयोदशी तिथि के दो करण होते हैं। पहला करण ‘वणिजा’ है, जो 07:12 बजे तक रहेगा। इसके बाद ‘विष्टि’ करण 20:27 बजे तक चलेगा। ज्योतिष शास्त्र में विष्टि करण को भद्रा कहा जाता है और इसे अशुभ माना जाता है, इसलिए इस समय शुभ कार्यों से बचना चाहिए।

 

आज का शुभ मुहूर्त

मंगलवार के दिन अभिजीत मुहूर्त 11:41 से 12:23 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त को किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस मुहूर्त में किए गए कार्यों के सफल होने की संभावना अधिक रहती है।

 

आज का राहुकाल

राहुकाल दोपहर 14:41 से 16:00 बजे तक रहेगा। राहुकाल के दौरान किसी भी शुभ कार्य, यात्रा या नए कार्य की शुरुआत करना वर्जित माना जाता है। इसलिए इस समयावधि में महत्वपूर्ण कार्यों को टालना बेहतर रहेगा।

 

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

सूर्योदय प्रातः 06:45 बजे और सूर्यास्त शाम 17:20 बजे होगा। इन दोनों समयों के आधार पर दिन-रात की अवधि ज्ञात होती है और इसी से पंचांग की गणना की जाती है।

 

ग्रहों की स्थिति और चंद्रमा का राशिचक्र

आज चंद्रमा तुला राशि में संचरण करेंगे। तुला राशि के स्वामी शुक्र होते हैं और चंद्रमा का इस राशि में गोचर भावनात्मक संतुलन, कूटनीति और सामाजिकता बढ़ाता है। तुला राशि में चंद्र की स्थिति के कारण कला, सौंदर्य और रचनात्मक कार्यों के लिए यह दिन शुभ माना गया है।

 

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग

हिंदू पंचांग को वैदिक पंचांग भी कहा जाता है। यह समय और काल की सटीक गणना करने वाला ज्योतिषीय ग्रंथ है जो पांच अंगों—तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण पर आधारित होता है। तिथि सूर्य-चंद्र की दूरी से निर्धारित होती है, नक्षत्र 27 तारामंडलों पर आधारित हैं, वार ग्रह-आधारित दिन होते हैं, योग सूर्य-चंद्र की विशेष दूरी के अनुसार और करण एक तिथि के दो हिस्सों को दर्शाता है।

 

तिथि की विस्तृत जानकारी

हिंदू कैलेंडर में 30 तिथियां होती हैं—प्रतिपदा से पूर्णिमा/अमावस्या तक। तिथियां दो पक्षों में बंटी होती हैं: शुक्ल पक्ष (चंद्र वृद्धि) और कृष्ण पक्ष (चंद्र क्षय)। त्रयोदशी तिथि भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है।

 

नक्षत्र, योग और करण का महत्व

27 नक्षत्रों का स्वामित्व नौ ग्रहों के पास होता है और हर नक्षत्र की अपनी विशेष प्रकृति होती है। योग भी 27 प्रकार के होते हैं जैसे विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य आदि। करण कुल 11 प्रकार के होते हैं जैसे वणिज, विष्टि, बालव, कौलव आदि। भद्रा (विष्टि करण) में शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।

 

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