टोंक, संवाददाता: केशव राज सैन
मंगलवार देर रात टोंक जिले में बनास नदी पुल हादसा टोंक ने नेशनल हाइवे 52 पर अफरा-तफरी मचा दी। तेज रफ्तार ट्रेलर ने ब्रेकडाउन होकर खड़े कंटेनर को टक्कर मार दी, जिससे कंटेनर पुल की रेलिंग तोड़ते हुए बनास नदी में झूल गया। इस हादसे में ट्रेलर चालक केबिन में फंस गया और एक राहगीर संतुलन बिगड़ने से नदी में गिर पड़ा।
कैसे हुआ NH-52 पर दर्दनाक सड़क हादसा
टोंक से गुजरने वाले NH-52 पर बनास नदी पुल के बीचोंबीच एक कंटेनर तकनीकी खराबी के कारण खड़ा था। रात के समय तेज रफ्तार से आ रहे ट्रेलर चालक को समय रहते कंटेनर दिखाई नहीं दिया और जोरदार टक्कर हो गई। बनास नदी पुल हादसा टोंक का यह क्षण कुछ सेकंड में ही भयावह रूप ले बैठा।
कंटेनर का पुल से टूटकर बनास नदी में झूलना
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कंटेनर पुल की सुरक्षा रेलिंग तोड़ते हुए बनास नदी में जा लटका। गनीमत रही कि कंटेनर का चालक कुछ ही पल पहले वाहन से उतर चुका था, वरना यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था। लटकता हुआ कंटेनर हादसे की भयावहता को साफ दर्शा रहा था।
ट्रेलर चालक का केबिन में फंसना और रेस्क्यू ऑपरेशन
टक्कर के बाद ट्रेलर की केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और चालक महावीर गुर्जर स्टेयरिंग में फंस गया। सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। लगभग तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद चालक को बेहोशी की हालत में बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया। बनास नदी पुल हादसा टोंक में यह रेस्क्यू ऑपरेशन सबसे चुनौतीपूर्ण रहा।
राहगीर का नदी में गिरना, पुलिस ने बचाई जान
हादसे के दौरान हनुमान गुर्जर नामक राहगीर लटकते कंटेनर को देखने के लिए पुल पर रुका। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से वह सीधे बनास नदी में गिर गया। मौके पर मौजूद टोंक सदर थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया। समय रहते मदद मिलने से उसकी जान बच गई।
ट्रैफिक जाम और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
बनास नदी पुल हादसा टोंक के बाद NH-52 पर दोनों ओर लंबा जाम लग गया। भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई। पुलिस ने पहले एक लेन में ट्रैफिक सुचारू कराया और बाद में वैकल्पिक मार्गों से ट्रैफिक डायवर्ट किया। कई घंटों की मशक्कत के बाद हालात सामान्य हो पाए।
DSP टोंक का बयान और प्रशासन की भूमिका
मौके पर खुद DSP टोंक मृत्युंजय मिश्रा मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, एंबुलेंस और रेस्क्यू टीमें सक्रिय की गईं। प्राथमिकता घायलों की जान बचाने और ट्रैफिक बहाल करने की रही। प्रशासन की तत्परता से बड़ा नुकसान टल गया।
गनीमत से टली बड़ी जनहानि
इस भीषण सड़क हादसे में सबसे राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई। कंटेनर में कोई मौजूद नहीं था, ट्रेलर चालक को समय रहते बाहर निकाल लिया गया और नदी में गिरे राहगीर को भी बचा लिया गया। बनास नदी पुल हादसा टोंक ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया।
NH-52 पर सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल
NH-52 जैसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर ब्रेकडाउन वाहनों की समय पर चेतावनी और रिफ्लेक्टर की व्यवस्था न होना गंभीर सवाल खड़े करता है। तेज रफ्तार, कम रोशनी और भारी वाहनों की अनियंत्रित गति ऐसे हादसों की बड़ी वजह बन रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा तय सुरक्षा मानकों की सख्ती से पालना जरूरी है।
सबक और सावधानियां
बनास नदी पुल हादसा टोंक से यह साफ है कि थोड़ी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ब्रेकडाउन वाहनों के लिए चेतावनी संकेत, गति नियंत्रण और रात में अतिरिक्त सतर्कता बेहद जरूरी है। प्रशासन, वाहन चालकों और आम लोगों—सभी को मिलकर सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।
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