टोंक, संवाददाता: केशव
Zila Pramukh Sthayikaran प्रक्रिया के तहत जिले की जिला प्रमुख सरोज नरेश बंसल ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन दो बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए। यह फैसला न केवल प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन पर सीधा प्रभाव डालने वाला भी साबित हुआ। आखिरी कार्य दिवस पर भी उन्होंने जनहित को प्राथमिकता देते हुए कई अटके हुए कार्य निपटाए।
जिला प्रमुख की विदाई और पांच वर्षों की उपलब्धियाँ
बुधवार को जिला प्रमुख और जिले के अन्य प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो गया। जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्यों और स्टाफ ने उन्हें भावनात्मक समारोह के साथ विदाई दी। जिले की जनता और प्रशासन उनके पांच साल का कार्यकाल सक्रिय, जनहितकारी और परिणाम आधारित बताते हैं।
63 शिक्षकों का स्थायीकरण—सबसे बड़ा प्रशासनिक फैसला
आखिरी दिन Zila Pramukh Sthayikaran प्रक्रिया के अंतर्गत 63 शिक्षकों को स्थायी किया गया। यह निर्णय लंबे समय से इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए किसी सौगात से कम नहीं माना जा रहा। अब यह शिक्षक स्थाई सेवा लाभ, वेतन वृद्धि, पदस्थापन और सुरक्षा के साथ अपना भविष्य सुनिश्चित कर सकेंगे।
अन्नपूर्णा रसोई का 1 करोड़ का अटका बिल पास
जिला प्रमुख ने अन्नपूर्णा रसोई से जुड़े ₹1 करोड़ के अटके हुए बिल को भी अपने अंतिम दिन पास किया। इस फैसले से रसोई संचालकों को राहत मिली है, जो कई महीनों से भुगतान न होने के कारण आर्थिक संकट झेल रहे थे। यह कदम दर्शाता है कि Zila Pramukh Sthayikaran केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण था।
पांच साल में 35 करोड़ के विकास कार्य
सरोज नरेश बंसल ने कहा कि उन्होंने जिला प्रमुख पद को जिस विज़न के साथ संभाला था, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विकास मॉडल के अनुसार पूरे समर्पण के साथ लागू किया। उनके कार्यकाल में— 35 करोड़ रुपए के विकास कार्य, सड़क, भवन निर्माण, पेयजल, सामुदायिक सुविधाओं में बड़े सुधार, ग्रामीण क्षेत्रों तक विकास परियोजनाओं की पहुँच, उन्होंने कहा कि “जो विजन लेकर आए थे, उसे ईमानदारी से पूरा किया है।”
प्लास्टिक मुक्त मिशन—जिला प्रमुख का प्रमुख फोकस
अपने कार्यकाल में उन्होंने जिले को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए व्यापक अभियान चलाया। Zila Pramukh Sthayikaran के साथ-साथ यह मिशन भी उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। उपलब्धियाँ: सभी ग्राम पंचायत कार्यालय प्लास्टिक मुक्त घोषित, जिला परिषद ने 50% लक्ष्य हासिल किया, बर्तन भंडार स्थापित कर लोगों को प्लास्टिक छोड़ने के लिए प्रेरित किया, उन्होंने कहा कि “अवधि बढ़ जाती तो इसे 80% तक सफल कर देते।”
धार्मिक स्थलों और ग्राम पंचायतों का विकास
जिला प्रमुख ने बताया कि उन्होंने पांच वर्षों में जिले के सभी धार्मिक स्थलों पर विशेष ध्यान दिया। विकास कार्यों में शामिल थे—सड़कों का निर्माण, सामुदायिक भवन, हैंडपंप और जल सुविधाएँ, इससे ग्रामीण और धार्मिक पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिला।
जनता और प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
उनके अंतिम दिन कार्यस्थल पर भावुक माहौल रहा। कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सरोज बंसल का कार्यकाल जिले की प्रगति के लिए अत्यंत प्रभावी रहा है। Zila Pramukh Sthayikaran और विकास की यह सूची उनके नेतृत्व की क्षमता को साबित करती है।
Zila Pramukh Sthayikaran के अंतिम दिन लिए गए निर्णय यह साबित करते हैं कि सरोज नरेश बंसल ने अपने पद की जिम्मेदारी अंत तक निभाई।
63 शिक्षकों का स्थायीकरण, अन्नपूर्णा रसोई के बिल का भुगतान, प्लास्टिक मुक्त अभियान और 35 करोड़ का विकास—यह सब उनके कार्यकाल की उपलब्धियों की मजबूत सूची तैयार करते हैं। जिले की जनता उन्हें एक सक्रिय, संवेदनशील और परिणाम देने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में याद रखेगी।
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें
क्रिकेट, स्पोर्ट्स और देश-दुनिया की लेटेस्ट खबरों के लिए हमारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को फॉलो करना न भूलें:
Instagram:
Facebook:
YouTube (Subscribe):
यहां आपको मिलेंगे लाइव अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज़, शॉर्ट वीडियो, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, मैच प्रीव्यू और रिव्यू
eNewsBharat के साथ जुड़े रहें
देश-विदेश के स्पोर्ट्स और सभी बड़ी घटनाओं की पल–पल की खबरें पाने के लिए eNewsBharat को लगातार विज़िट करते रहें। आपका भरोसा ही हमारी ताकत है — हम आगे भी आपको सबसे तेज़ और सटीक खबरें पहुंचाते रहेंगे।
अधिक खबरों के लिए पढ़ें -> eNews-bharat
#ZilaPramukhSthayikaran #RajasthanNews #TeacherPermanent #DevelopmentWork #PlasticFreeMission #AnnapurnaRasoi #DistrictCouncil #ENewsBharat #enewsrajasthan