बारां, संवाददाता: जयप्रकाश शर्मा
chouth mela के अवसर पर मांगरोल कस्बे सहित पूरे तहसील क्षेत्र में मंगलवार को आस्था और श्रद्धा का विशेष वातावरण देखने को मिला। तिल चौथ के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर मां चौथ माता की पूजा-अर्चना की। सुबह से ही मंदिरों और मार्गों पर भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
सीमली चौथ माता मेले में उमड़ी भीड़
जो श्रद्धालु पदयात्रा या अन्य कारणों से चौथ बरवाड़ा नहीं जा सके, उन्होंने सीमली चौथ माता मंदिर को अपनी श्रद्धा का केंद्र बनाया। chouth mela के अंतर्गत सीमली चौथ मेले में श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में भक्त माता रानी के दर्शन के लिए पहुंचे।
चौथ बरवाड़ा न जा सके श्रद्धालुओं ने सीमली में किए दर्शन
परिवार सहित श्रद्धालु पैदल, बाइक, ट्रैक्टर और अन्य निजी वाहनों से सीमली चौथ माता के दर्शन करने पहुंचे। chouth mela में यह दृश्य देखने लायक था कि श्रद्धालु अपनी सुविधा से नहीं, बल्कि श्रद्धा से प्रेरित होकर यात्रा कर रहे थे।
पैदल यात्राएं और वाहनों की लंबी कतारें
श्रद्धालुओं की भारी संख्या के कारण हरसोली से सीमली चौथ जाने वाले मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लगभग एक किलोमीटर पहले श्रद्धालुओं ने अपने वाहन खड़े कर दिए और पैदल ही माता रानी के दर्शन के लिए आगे बढ़े। chouth mela के दौरान यह मार्ग पूरी तरह श्रद्धालुओं से भर गया।
महिलाओं और बच्चों की बड़ी सहभागिता
मेले में महिलाओं, पुरुषों, वृद्धों के साथ-साथ बालक-बालिकाओं की भी बड़ी संख्या देखने को मिली। दूर-दराज से पैदल चलकर पहुंची महिलाओं की श्रद्धा chouth mela को और भी भावनात्मक बना रही थी।
दूर-दराज गांवों से पहुंचे श्रद्धालु
सीमली चौथ मेले में बोहत, हरसोली, बांरा, सीसवाली सहित कई गांवों से श्रद्धालु पहुंचे। सीसवाली से बांरा और अन्य मार्गों से आने वाले भक्तों ने अपने वाहनों को दूर खड़ा कर पैदल दर्शन किए, जो chouth mela की आस्था को दर्शाता है।
सड़क मार्गों पर लगे भंडारे
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सड़क मार्ग पर जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया गया। भंडारों में जलपान और प्रसाद की व्यवस्था की गई, जिससे यात्रियों को राहत मिली। chouth mela में सेवा और भक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
प्रशासन व स्थानीय सहयोग
भीड़ को नियंत्रित रखने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्थानीय स्तर पर सहयोग देखने को मिला। ग्रामीणों और स्वयंसेवकों ने chouth mela को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
श्रद्धा और परंपरा का जीवंत उदाहरण
सीमली चौथ माता का यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण है। chouth mela ने यह साबित कर दिया कि आज भी लोक विश्वास और धार्मिक परंपराएं लोगों के जीवन में गहराई से जुड़ी हुई हैं।
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