जोधपुर, संवाददाता: कपिल सांखला
गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित होने वाली परेड में बीएसएफ ऊंट दस्ता परेड हर वर्ष विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। इस वर्ष भी कर्तव्य पथ पर सीमा सुरक्षा बल का ऊंट दस्ता अपनी शान, अनुशासन और पारंपरिक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगा। बीएसएफ ऊंट दस्ता परेड भारतीय सीमाओं की सुरक्षा, परंपरा और वीरता का प्रतीक मानी जाती है।
कर्तव्य पथ पर फिर दिखेगा ऊंट दस्ते का शौर्य
गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर कदमताल करता बीएसएफ ऊंट दस्ता परेड की गरिमा को और ऊंचा करेगा। ऊंटों की सधी हुई चाल और जवानों का अनुशासन देश की सैन्य परंपरा को दर्शाता है। यह दस्ता परेड में शामिल सभी झांकियों और टुकड़ियों में अपनी अलग पहचान रखता है।
90 ऊंटों के साथ भव्य प्रस्तुति
इस वर्ष बीएसएफ ऊंट दस्ता परेड में कुल 90 ऊंट शामिल किए गए हैं। इनमें से 60 ऊंट जोधपुर सीमांत और 40 ऊंट बीकानेर सीमांत से लिए गए हैं। इतने बड़े ऊंट दस्ते की समन्वित प्रस्तुति परेड को और भी भव्य बना देगी।
कैमल माउंटेड बैंड बनेगा आकर्षण
बीएसएफ ऊंट दस्ता परेड में केवल ऊंट सवार ही नहीं, बल्कि कैमल माउंटेड बैंड भी शामिल रहेगा। बैंड की धुनों के साथ ऊंटों की कदमताल परेड की शोभा को कई गुना बढ़ा देती है। यह संयोजन परंपरा और सैन्य संगीत का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है।
महेंद्र पाल सिंह राठौड़ के हाथ में कमान
बीएसएफ ऊंट दस्ता परेड की कमान इस वर्ष डिप्टी कमांडेंट महेंद्र पाल सिंह राठौड़ संभाल रहे हैं। वे राजस्थान के जोधपुर निवासी हैं और वर्तमान में बीएसएफ में उप समादेष्टा के पद पर कार्यरत हैं। उनके नेतृत्व में यह दस्ता अनुशासन और गरिमा का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करेगा।
1976 से चली आ रही गौरवशाली परंपरा
बीएसएफ ऊंट दस्ता परेड वर्ष 1976 से लगातार गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेता आ रहा है। इतने लंबे समय से इस परंपरा का निर्वहन करना बीएसएफ की सांस्कृतिक और सैन्य विरासत को दर्शाता है। हर वर्ष यह दस्ता देशवासियों के दिलों में विशेष स्थान बनाता है।
जोधपुर और बीकानेर सीमांत का योगदान
बीएसएफ ऊंट दस्ता परेड में शामिल ऊंट राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों से आते हैं। जोधपुर और बीकानेर सीमांत का योगदान इस दस्ते की रीढ़ माना जाता है। रेगिस्तानी परिस्थितियों में प्रशिक्षित ये ऊंट सीमाओं की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
बलिदान और परंपरा का संदेश
कर्तव्य पथ पर चलता बीएसएफ ऊंट दस्ता केवल परेड का हिस्सा नहीं होता। यह देश की सीमाओं की रक्षा, बलिदान और अनुशासन का संदेश भी देता है। ऊंट दस्ता भारत की परंपरा और सैन्य शक्ति का प्रतीक बनकर सामने आता है।
शहीद पिता से प्रेरित देशसेवा की राह
डिप्टी कमांडेंट महेंद्र पाल सिंह राठौड़ मूल रूप से नागौर जिले की मेड़ता सिटी के पास स्थित गांव गगराना के निवासी हैं। उनके पिता रघुनाथ सिंह राठौड़ भी बीएसएफ में डिप्टी कमांडेंट थे। वर्ष 1990 में मणिपुर में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान वे शहीद हो गए थे। पिता की शहादत से प्रेरित होकर महेंद्र पाल सिंह राठौड़ ने भी बीएसएफ ज्वाइन कर देशसेवा का मार्ग चुना।
शान, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक
बीएसएफ ऊंट दस्ता परेड गणतंत्र दिवस की शान को और ऊंचा करने वाली परंपरा है। 90 ऊंटों का यह दस्ता कर्तव्य पथ पर राष्ट्रभक्ति, बलिदान और गौरव का संदेश देगा।
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