जोधपुर, संवाददाता: कपिल सांखला
राम नाम साधना को साकार करने वाली जोधपुर की डॉ. शिवानी मंडा आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि यदि साधना सच्ची हो, तो आलोचनाएं मार्ग की बाधा नहीं बनतीं, बल्कि शक्ति बन जाती हैं। चिकित्सा जैसे व्यस्त पेशे से जुड़े होने के बावजूद डॉ. शिवानी ने बीते 6 वर्षों में 10 लाख से अधिक बार भगवान श्रीराम का नाम लिखकर आस्था, कला और अनुशासन का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है।
डॉक्टर शिवानी मंडा की प्रेरणादायी कहानी
राम नाम साधना की यह कहानी जोधपुर की एक सामान्य बेटी से शुरू होती है, जो डॉक्टर बनने के बाद भी अपनी आत्मा की आवाज़ को नहीं भूल पाई। डॉ. शिवानी मंडा पेशे से डॉक्टर हैं, लेकिन पहचान उन्हें उनके राम नाम से बने दिव्य आर्टवर्क से मिली, जिसने आज हजारों लोगों को भक्ति और साधना से जोड़ दिया है।
तानों के बावजूद नहीं छोड़ी साधना
राम नाम साधना के शुरुआती दिनों में डॉ. शिवानी को समाज से ताने भी सुनने पड़े। लोगों ने कहा कि अब डॉक्टर बन गई हो, पैसा कमाओ, क्लिनिक खोलो, लेकिन राम नाम लिखने से क्या मिलेगा। इन बातों को नजरअंदाज करते हुए उन्होंने साधना जारी रखी और अपनी हॉबी को जीवित रखा।
राम नाम से आर्ट बनाने की शुरुआत
राम नाम साधना की शुरुआत उन्होंने अपनी जॉब जॉइन करने के पहले ही दिन कर दी थी। उन्होंने ड्यूटी के पहले दिन एक कागज पर राम नाम लिखा और मन में ठान लिया कि इससे कुछ विशेष बनाया जाएगा। यहीं से उनकी कला और साधना की यात्रा शुरू हुई।
राम मंदिर से शुरू हुआ कला का सफर
राम नाम साधना को आकार मिला उस समय, जब राम मंदिर का भूमि पूजन हो रहा था। डॉ. शिवानी ने राम मंदिर के नक्शे को 76,100 बार लिखे गए “राम” शब्दों से बनाया, जिसे उन्होंने 75 घंटे में टाइमर लगाकर पूरा किया। इससे उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ।
सोशल मीडिया से मिली पहचान
राम नाम साधना को नई पहचान तब मिली जब उन्होंने हनुमान जी का पोर्ट्रेट बनाकर इंस्टाग्राम पर साझा किया। यह आर्टवर्क रातों-रात वायरल हुआ। हजारों लोगों ने “जय श्री राम” लिखकर प्रतिक्रिया दी, जिससे उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।
इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड तक पहुंच
राम नाम साधना के क्रम में उन्होंने 1,11,111 शब्दों से राम दरबार का निर्माण किया। इस अद्भुत कृति को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए नामांकित किया गया। इसके बाद पंचमुखी हनुमान, खाटू श्याम सहित अनेक देवी-देवताओं के आर्टवर्क तैयार किए।
आर्टवर्क की प्रक्रिया और अनुशासन
राम नाम साधना केवल भावनाओं पर नहीं, बल्कि अनुशासन पर आधारित है। डॉ. शिवानी किसी भी आर्टवर्क को बनाने से पहले उसकी नियमित प्रैक्टिस करती हैं, फिर उसे फाइनल रूप देती हैं। यह प्रक्रिया संयम और ध्यान की मिसाल है।
वर्कशॉप के जरिए सेवा का संकल्प
राम नाम साधना अब केवल व्यक्तिगत साधना नहीं रही, बल्कि समाज सेवा का माध्यम बन चुकी है। डॉ. शिवानी अब 6 से 60 वर्ष तक के लोगों के लिए ऑनलाइन-ऑफलाइन वर्कशॉप आयोजित करती हैं। 199 रुपये की फीस सीधे संस्थाओं को दान की जाती है, क्योंकि उनके लिए यह व्यवसाय नहीं, सेवा है।
राम नाम साधना: समाज के लिए संदेश
राम नाम साधना ने यह सिद्ध किया है कि भक्ति, कला और कर्म एक साथ चल सकते हैं। डॉ. शिवानी मानती हैं कि राम नाम ने उन्हें धैर्य, परिश्रम और संयम सिखाया। उन्होंने कभी प्रसिद्धि के लिए यह मार्ग नहीं चुना, फिर भी आज उनकी साधना लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है।
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