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अभिरामदास त्यागी बोले: निंदा से बचकर और अहंकार त्यागकर ही ईश्वर की प्राप्ति

बाराँ ,हरनावदाशाहजी (कामरान अली) 

 

कस्बे में शुक्रवार से शुरू हुई सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ एक भव्य और आकर्षक कलश यात्रा के साथ हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। शिवालय गुफा मंदिर से निकली इस शोभायात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए—महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सभी भक्ति के रंग में सराबोर दिखाई दिए।कलश यात्रा जब मुख्य मार्गों से गुजरी, तो जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, रंगोलियाँ और स्वागत से वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। गलियों में ढोल-नगाड़ों की ध्वनि गूंजती रही और भक्तों के जयकारों से पूरा कस्बा धर्ममय हो उठा।कथा स्थल पहुँचने के बाद विधिवत पूजा-अर्चना हुई और प्रथम दिवस की कथा का शुभारंभ किया गया।

 

गुरुदेव का संदेश: ‘‘निंदा से बचकर, अहंकार त्यागकर ही मिलता है भगवान’’

भागवत कथा के प्रथम दिवस पर श्री अभिरामदास त्यागी ने अपने प्रवचन में जीवन के मूल्यों पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा—“बूराई, निंदा और अहंकार से दूर रहकर तथा सत्य, प्रेम, करुणा और सेवा जैसे गुणों को जीवन में अपनाकर ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है।”उन्होंने बताया कि संसार में मनुष्य बहुत हैं, परंतु महापुरुष का सान्निध्य उसी को मिलता है जिसके पूर्व जन्मों के पुण्य उदय होते हैं।उन्होंने कहा—“सूरज की रोशनी जैसे अंधकार दूर करती है, वैसे ही सत्संग जीवन के भ्रम और अज्ञान को मिटाकर धर्म का मार्ग दिखाता है।”

 

धुंधुकारी–गोकर्ण कथा का भावपूर्ण वर्णन

गुरुदेव ने धुंधुकारी और गोकर्ण की पावन कथा का विस्तार से वर्णन किया और बताया कि मनुष्य के श्रेष्ठ कर्म ही भविष्य में धर्म का स्वरूप बनते हैं।कथा के दौरान भाव-विभोर होकर कई श्रद्धालु आंसू नहीं रोक पाए।

 

भजनों पर झूमे श्रद्धालु, भक्ति रस से सराबोर हुआ पंडाल

संगीत मंडली द्वारा प्रस्तुत भजनों ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया।“सुमिरन बिन गोता खाएगा…”और“यहाँ कोई-कोई रे, राम भजन को पारखी कोई-कोई रे…”जैसे भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति में डुबो दिया।

 

परमानंद नागर ने दी 1.25 लाख की प्रथम भेंट

कथा प्रारंभ से पहले आयोजित खुली बोली में परमानंद नागर (फोर्ड वाले) ने ₹1,25,000 की प्रथम भेंट देकर मुख्य यजमान बनने की घोषणा की।पहले दिन की प्रसादी शिवचरण प्रजापति दीगोद जागीर परिवार की ओर से वितरित की गई।

 

प्रतिदिन 12 से 3 बजे तक कथा, 4 दिसंबर को पूर्णाहुति

कथा आयोजन समिति ने बताया कि सात दिवसीय कथा का दिव्य रसपान प्रतिदिन दोपहर 12 से 3 बजे तकमेला मैदान स्थित बाग वाले हनुमान मंदिर परिसर में कराया जा रहा है।भीड़ हर दिन बढ़ती जा रही है और श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुँचकर धर्मलाभ ले रहे हैं।कथा की पूर्णाहुति 4 दिसंबर (गुरुवार) को होगी।हरनावदाशाहजी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाने का अवसर बन चुकी है। अभिरामदास त्यागी के संदेश—“निंदा से दूर रहो, अहंकार त्यागो, और सेवा अपनाओ”—ने श्रवण करने वालों के हृदय पर गहरा प्रभाव छोड़ा है।

 

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