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manav taskari workshop: श्रीगंगानगर में बंधुआ मजदूरी पर बड़ी पहल, सेवा प्रदाताओं को कानून व पुनर्वास की दी गई विशेष ट्रेनिंग

श्री गंगानगर, संवाददाता: गोपी बेनीवाल

 

manav taskari workshop का आयोजन श्रीगंगानगर में बाल कल्याण समिति एवं उरमूल रूरल हेल्थ रिसर्च एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। तपोवन ट्रस्ट प्रांगण में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सेवा प्रदाताओं की क्षमता बढ़ाना और उन्हें मानव तस्करी व बंधुआ मजदूरी के कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं से गहराई से जोड़ना रहा। यह manav taskari workshop समाजसेवी महेश पेड़ीवाल की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें प्रशासन, सामाजिक संस्थाएं, कानून से जुड़े विशेषज्ञ और फील्ड लेवल पर कार्य करने वाले सेवा प्रदाता शामिल हुए।

 

संयुक्त पहल: कौन-कौन रहे आयोजक

इस manav taskari workshop में बाल कल्याण समिति की सक्रिय भूमिका रही, वहीं उरमूल रूरल हेल्थ रिसर्च एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट ने तकनीकी और प्रोजेक्ट आधारित सहयोग प्रदान किया। कार्यशाला को एक साझा मंच के रूप में विकसित किया गया, ताकि सभी हितधारक एक साथ संवाद कर सकें। मुख्य अतिथि के रूप में बाल कल्याण समिति अध्यक्ष जोगेंद्र कौशिक उपस्थित रहे, जबकि श्रम निरीक्षक ममता सिहाग विशिष्ट अतिथि रहीं।

 

सेवा प्रदाताओं के लिए क्यों जरूरी है manav taskari workshop

manav taskari workshop का केंद्र बिंदु सेवा प्रदाता रहे, क्योंकि यही वह कड़ी हैं जो पीड़ित, समाज और प्रशासन को आपस में जोड़ती है। यदि सेवा प्रदाताओं को कानून, प्रक्रिया और संवेदनशीलता की पूरी जानकारी होगी, तभी पीड़ितों को समय पर न्याय और पुनर्वास मिल सकता है। कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि केवल रेस्क्यू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पीड़ित को सम्मानजनक जीवन की ओर लौटाना भी उतना ही जरूरी है।

 

बंधुआ मजदूरी की गंभीरता और सरकारी लक्ष्य

प्रोजेक्ट मैनेजर चैनाराम बिश्नोई ने manav taskari workshop में संस्थान के कार्यों का परिचय देते हुए बताया कि वर्ष 2016 में तत्कालीन श्रम मंत्री बंदारू दत्तात्रेय ने राज्यसभा में जानकारी दी थी कि वर्ष 2030 तक लगभग 1.84 करोड़ बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि बंधुआ मजदूरी आज भी एक गंभीर सामाजिक समस्या है और इसे खत्म करने के लिए सभी की सहभागिता जरूरी है।

 

श्रीगंगानगर का संवेदनशील सामाजिक परिदृश्य

मुख्य अतिथि जोगेंद्र कौशिक ने manav taskari workshop में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि श्रीगंगानगर लंबी दूरी की ट्रेनों का अंतिम ठहराव स्थल है। इसी कारण बाल मजदूरी, मानव तस्करी और भिक्षावृत्ति जैसी गतिविधियों के लिए यह क्षेत्र अधिक संवेदनशील बन जाता है। उन्होंने कहा कि कई बार शोषण के शिकार लोग अनजाने में यहां पहुंच जाते हैं, जहां उन्हें अपराधियों द्वारा फिर से निशाना बनाया जाता है। ऐसे में प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होती है।

 

बंधुआ मजदूरी पर कानूनी प्रावधानों की जानकारी

कार्यक्रम समन्वयक महावीर आज़ाद ने manav taskari workshop में बंधुआ मजदूरी की परिभाषा और उसके कानूनी तत्वों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम 1976 की धारा 5, 6, 16, 17 और 18 की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि रेस्क्यू, एफआईआर, मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया किस प्रकार चरणबद्ध तरीके से पूरी की जानी चाहिए।

 

मानव तस्करी और संविधानिक अधिकार

मानव तस्करी विरोधी यूनिट के शीशराम ने manav taskari workshop में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 पर चर्चा की, जिसमें मानव तस्करी और जबरन श्रम को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया गया है। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को केवल अधिकार नहीं देता, बल्कि राज्य और समाज को जिम्मेदारी भी सौंपता है कि ऐसे अपराधों को जड़ से खत्म किया जाए।

 

महिलाओं और बच्चों पर शोषण का प्रभाव

कार्यशाला के अध्यक्ष महेश पेड़ीवाल ने अपने संबोधन में कहा कि विमंदित महिलाएं और बच्चे शोषणकर्ताओं के लिए सबसे आसान शिकार बनते हैं। manav taskari workshop में उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों का असर केवल पीड़ित तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके बच्चों और आने वाली पीढ़ी तक पहुंचता है। उन्होंने संवेदनशील, मानवीय और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

 

सतर्कता समिति और प्रशासन की भूमिका

कार्यक्रम का संचालन करते हुए जगसीर सिंह गिल ने जिला मजिस्ट्रेट द्वारा गठित सतर्कता समिति की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि manav taskari workshop जैसे कार्यक्रम सतर्कता समिति को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। किशोर न्याय बोर्ड के विकास सारस्वत, बाल कल्याण समिति सदस्य आनंद मारवाल और डॉ. रामप्रकाश शर्मा ने भी व्यावहारिक अनुभव साझा किए।

 

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