कोटा,संवाददाता : तेजपाल सिंह बग्गा
SDP Donation यानी Single Donor Platelet Donation, एक आधुनिक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें मशीन के माध्यम से दाता के रक्त से केवल प्लेटलेट्स निकाले जाते हैं। यह प्रक्रिया गंभीर रोगियों—जैसे डेंगू, कैंसर, बड़ी सर्जरी, या अत्यधिक रक्तस्राव—के उपचार में जीवनरक्षक मानी जाती है। एक ही डोनर से प्राप्त प्लेटलेट्स के कारण संक्रमण का खतरा कम होता है।
कोटा में राहुल की पहली SDP Donation की प्रेरक शुरुआत
कोटा के युवा राहुल कौशिक के लिए SDP Donation सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता का एहसास था। इससे पहले उन्होंने केवल दो बार सामान्य रक्तदान किया था, लेकिन एसडीपी डोनेशन उनके लिए एक नई भावनात्मक यात्रा की शुरुआत बन गया। पहली बार इस जरूरी और संवेदनशील प्रक्रिया से गुजरते हुए उनका मन थोड़ा असहज था, लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि किसी व्यक्ति की जान बचाने में उनका योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है, उन्होंने बिना झिझक कदम आगे बढ़ाया।
टीम जीवनदाता: वर्षों से चल रही सेवा की परंपरा
कोटा की जानी-मानी सामाजिक संस्था टीम जीवनदाता कई वर्षों से रक्तदान, प्लेटलेट डोनेशन और खासकर SDP Donation जैसी सेवाओं में सक्रिय है। उनके कार्यों का उद्देश्य सिर्फ मरीजों को मदद पहुंचाना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी है। टीम के संरक्षक और संयोजक भुवनेश गुप्ता—जो लायंस क्लब कोटा टेक्नो के निदेशक हैं—इस अभियान को लगातार मजबूती दे रहे हैं। टीम जीवनदाता की खास बात यह है कि इसमें युवा तेजी से जुड़ रहे हैं और नई पीढ़ी सेवा का नेतृत्व करने लगी है।
मरीज राज नारायण की गंभीर आवश्यकता
घटना तब शुरू हुई जब टीम जीवनदाता के पास राजेश का फोन आया, जिनके पिता राज नारायण को AB-पॉजिटिव प्लेटलेट्स की तत्काल आवश्यकता थी। अस्पताल में स्थिति गंभीर होती जा रही थी और परिवार बेचैन था। ऐसे में टीम जीवनदाता सक्रिय हुई और समाधान तलाशने लगी।उसी समय ब्लड बैंक में मौजूद राहुल ने यह स्थिति देखी। जब उन्हें पता चला कि उनका अपना ब्लड ग्रुप AB पॉजिटिव है, तो उन्होंने सेवा भावना के तहत तुरंत डोनेशन करने की इच्छा जताई। यही वह क्षण था जिसने एक आवश्यकता को उम्मीद में बदल दिया।
राहुल का अनुभव—सुकून, संतोष और मानवता का जागरण
जैसे ही SDP Donation प्रक्रिया शुरू हुई, राहुल को एहसास हुआ कि यह सिर्फ रक्तदान नहीं, बल्कि जीवनदान है। लगभग डेढ़ घंटे की पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने मन में एक अनोखी शांति महसूस की। डोनेशन पूरा होने के बाद राहुल ने कहा— “यह मेरे जीवन का सबसे सुकून देने वाला अनुभव है। ऐसा लगा जैसे दिल में मानवता का एक नया भाव जन्म ले रहा है। मैं आगे भी नियमित रूप से एसडीपी डोनेट करूंगा।” यह अनुभव न सिर्फ राहुल के लिए विशेष था, बल्कि राज नारायण के परिवार के लिए जीवन बदल देने वाला साबित हुआ।
SDP Donation के लाभ और समाज पर प्रभाव
SDP Donation विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है क्योंकि एक ही डोनर की प्लेटलेट्स एक मरीज के लिए पर्याप्त होती हैं, जबकि सामान्य प्लेटलेट डोनेशन में कई डोनर्स की प्लेटलेट्स मिलानी पड़ती हैं। साथ ही, संक्रमण का खतरा भी बहुत कम होता है। यह सुरक्षित प्रक्रिया है और डोनर 48–72 घंटों में फिर से पूरी तरह सामान्य प्लेटलेट स्तर पर लौट आता है।
युवाओं के बीच बढ़ती जागरूकता
कोटा जैसे शहरों में युवाओं में प्लेटलेट और SDP Donation के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। राहुल जैसे युवा समाज के लिए मिसाल हैं। उनके एक कदम ने न केवल एक मरीज की जान बचाई, बल्कि कई अन्य युवाओं को प्रेरित भी किया। टीम जीवनदाता का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में एसडीपी डोनर्स की संख्या कई गुना बढ़े, ताकि कोई भी मरीज प्लेटलेट्स की कमी के कारण संकट में न आए।
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