लाम्बा हरि सिंह क्षेत्र स्थित विद्यालय में आयोजित ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की शुरूआत उत्साहपूर्ण थी। इस कार्यक्रम में 198 पौधे लगाए गए थे और 2500 विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिक उत्साहपूर्वक भाग लिया।परंतु,विद्यालय प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण पौधों की सुरक्षा, सिंचाई और घेराबंदी की व्यवस्था नहीं की गई।सिंचाई और सुरक्षा की कमी के कारण सैकड़ों मवेशियों ने पौधों को चर लिया, जिससे अधिकांश पौधे नष्ट हो गए।स्थानीय खेल प्रेमियों ने कई बार प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।पौधों की सुरक्षा के लिए अभिभावकों और खेल प्रेमियों ने स्वयं कदम उठाया और मवेशियों को चिन्हित कर पुलिस कार्रवाई एवं जुर्माने की मांग की।
खेल मैदान असामाजिक गतिविधियों का केंद्र
खेल मैदान अब शराबियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। टूटी हुई कांच की बोतलें बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि अभियान केवल फोटो-शूट तक सीमित रह गया, जबकि पौधों और मैदान की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया।
स्थानीय लोगों की नाराज़गी
ग्रामीण और खेल प्रेमी इस बात से चिंतित हैं कि न केवल प्राकृतिक वातावरण की हानि हुई, बल्कि बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप करने और पौधों की पुनर्स्थापना के साथ-साथ खेल मैदान को सुरक्षित बनाने की मांग की है।
समाधान और सुधार की आवश्यकता
स्थानीय लोगों का सुझाव है कि:
पौधों की सुरक्षा के लिए घेराबंदी और नियमित निगरानी हो।
खेल मैदान पर नियमित पुलिस और प्रशासनिक निगरानी सुनिश्चित की जाए।
बच्चों और युवाओं के लिए सुरक्षित खेल क्षेत्र बनाए जाएं।
ऐसे कदमों से ही ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियान सिर्फ दिखावटी कार्यक्रम न रहकर स्थायी पर्यावरण संरक्षण में बदल सकते हैं।
संवाददाता_मनीष टेलर
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