बकानी, संवाददाता: रमेशचंद शर्मा
राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार जर्जर भवन वाले विद्यालयों के विद्यार्थियों को निकटतम सुरक्षित विद्यालय में समन्वित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसी क्रम में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय देवर को यहां से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित रेपला विद्यालय में समन्वय करने का आदेश प्राप्त हुआ। इस आदेश के बाद गांव में चिंता और असंतोष का माहौल बन गया।
सरकार के आदेश के बाद गांव में चिंता
Devar School Samayojan Virodh का मुख्य कारण बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़ा है। ग्रामवासियों का कहना है कि विद्यालय का अन्यत्र समायोजन हो जाना गांव के लिए बेहद चिंताजनक विषय है। खासकर छोटे बच्चों और बालिकाओं को 3 किलोमीटर दूर भेजना सुरक्षित नहीं है। Devar School Samayojan Virodh इसी आशंका और डर से उपजा है।
3 किलोमीटर दूर स्कूल समन्वय पर आपत्ति
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि 3 किमी दूर स्कूल भेजना व्यावहारिक नहीं है। अभिभावकों का मानना है कि दूरस्थ विद्यालय में समन्वय होने से बच्चों की नियमित उपस्थिति प्रभावित होगी। बालिकाओं की सुरक्षा और आवागमन सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया। Devar School Samayojan Virodh में यही मांग प्रमुख रही कि विद्यालय गांव में ही संचालित रहे।
ग्रामसभा बैठक में सामूहिक विरोध
Devar School Samayojan Virodh को लेकर विद्यालय परिसर में बैठक आयोजित की गई। पूर्व सूचना के अनुसार स्थानीय विद्यालय में समिति सदस्यों, अभिभावकों और ग्रामवासियों की बैठक हुई। बैठक में सभी ने एकमत होकर समन्वय आदेश का विरोध किया और असहमति दर्ज कराई। ग्रामीणों ने प्रशासन से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
बालिकाओं और छोटे बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा
Devar School Samayojan Virodh में बालिकाओं की शिक्षा सबसे अहम विषय रहा। ग्रामीणों ने कहा कि यदि विद्यालय गांव से बाहर चला गया, तो विशेष रूप से बालिकाओं की पढ़ाई प्रभावित होगी। लंबे रास्ते और यातायात की समस्या से अभिभावक चिंतित हैं। गांव में ही विद्यालय सुरक्षित रखना सभी की प्राथमिकता बताई गई।
जर्जर भवन को दुरुस्त करने का निर्णय
Devar School Samayojan Virodh के बीच समाधान भी गांव ने खुद खोजा। ग्रामवासियों और विद्यालय कर्मचारियों ने निर्णय लिया कि जर्जर भवन को सुरक्षित बनाया जाएगा। विद्यालय भवन को पूर्ण रूप से टीन शेड युक्त कर मरम्मत कराने की पहल शुरू की गई। ग्रामीणों ने कहा कि शिक्षा का मंदिर गांव से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।
ग्रामवासी बने भामाशाह
सभी ग्रामवासियों ने मिलकर विद्यालय को सुरक्षित करने का संकल्प लिया। विद्यालय कर्मचारियों ने भी इस अभियान में भागीदारी निभाई। ग्रामीणों का कहना है कि सामूहिक प्रयास से भवन को सुरक्षित बनाकर बच्चों को गांव में ही शिक्षा दी जाएगी।
सरपंच सहित दानदाताओं की भूमिका
इस पहल के अंतर्गत देवर गांव के कई लोग भामाशाह बनकर आगे आए। राम नारायण गुर्जर, सरपंच – ₹21,000 रमेश चंद्र घनश्याम सहित अन्य ग्रामवासियों ने भी सहयोग का भरोसा दिलाया।
ग्रामीणों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर और भी लोग सहयोग करेंगे।
गांव में शिक्षा बचाने की सामूहिक पहल
अब शिक्षा बचाने का जनआंदोलन बन चुका है। ग्रामवासियों ने स्पष्ट किया कि विद्यालय को रेपला में समन्वित नहीं किया जाएगा। गांव के लोग स्वयं संसाधन जुटाकर विद्यालय भवन को सुरक्षित बनाएंगे, ताकि बच्चों को शिक्षा के लिए गांव छोड़कर न जाना पड़े। गांव की एकता और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह मामला केवल भवन का नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य का है। ग्रामवासियों द्वारा भामाशाह बनकर विद्यालय को सुरक्षित करने का निर्णय प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
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