बुंदी, संवाददाता : हेमराज सैनी
बूंदी शहर में आगामी बूंदी उत्सव की तैयारियाँ पूरे उत्साह के साथ चल रही हैं। इसी कड़ी में बूंदी उत्सव समिति ने गुरुवार को सभी धर्मों के गुरुओं को शोभायात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
समिति का उद्देश्य इस बार का बूंदी उत्सव केवल संस्कृति और कला तक सीमित न रहकर सर्वधर्म एकता और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बनाना है।
बायपास गुरुद्वारा में दिया गया निमंत्रण
आज बूंदी उत्सव समिति के सदस्यों ने बायपास गुरुद्वारा का दौरा किया और वहाँ के प्रधान सुखविंदर सिंह, पूर्व प्रधान चरणजीत सिंह, तथा जसवीर सिंह जी को बूंदी उत्सव का निमंत्रण पत्र सौंपा।गुरुद्वारा परिसर में समिति के सभी सदस्यों का शाल और सपोरा पहनाकर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर आपसी भाईचारे और एकता का संदेश पूरे वातावरण में गूंज उठा।
उपस्थित अधिकारी एवं समिति सदस्य
इस अवसर पर बूंदी उत्सव समिति के शोभायात्रा संयोजक श्री लक्ष्मीकांत मीणा (उपखंड अधिकारी), तहसीलदार श्री अर्जुन लाल, विकास समिति के राजकुमार दाधीच, के.सी. वर्मा, अशोक तलवास, और राजेंद्र भारद्वाज सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।सभी ने सामूहिक रूप से यह संदेश दिया कि बूंदी उत्सव का असली अर्थ एकता और विविधता में समरसता को बढ़ावा देना है।
अन्य धार्मिक स्थलों पर भी दिए गए आमंत्रण
केवल गुरुद्वारा ही नहीं, बल्कि समिति ने गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब, गुरुद्वारा बालचंदपाड़ा, शहर काजी श्री अब्दुल शकूर कादरी, श्री आत्माराम जी महाराज, बोहरा समाज के धर्मगुरु आमीन साहिब, जंगम बगीची के महंत देवेंद्रगिरी, और क्रिश्चियन धर्मगुरु श्री एलेक्स सन को भी व्यक्तिगत रूप से आमंत्रण पत्र दिए।यह पहल न केवल धार्मिक नेताओं को एक मंच पर लाने का प्रयास है, बल्कि बूंदी की सांस्कृतिक विरासत और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को साकार करती है।
बूंदी उत्सव – संस्कृति, एकता और लोक परंपरा का संगम
राजस्थान का एक प्रसिद्ध सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें लोक नृत्य, पारंपरिक संगीत, हस्तशिल्प प्रदर्शनी और शोभायात्रा मुख्य आकर्षण होते हैं।इस वर्ष का उत्सव विशेष रूप से सर्वधर्म सद्भाव को केंद्र में रखकर मनाया जा रहा है। आयोजन समिति ने बताया कि सभी धर्मों और समाजों की भागीदारी से यह उत्सव और भी भव्य बनेगा।“बूंदी उत्सव आम जनता का उत्सव है। जब हर समुदाय और धर्म इसमें शामिल होगा, तभी इसकी सुंदरता और अर्थ पूर्ण रूप से उभरकर आएंगे।”
बूंदी उत्सव: एकता का प्रतीक
इस पहल के माध्यम से बूंदी उत्सव समिति ने यह स्पष्ट किया है कि धर्म, संस्कृति और समाज का संगम ही भारतीय परंपरा की सबसे बड़ी पहचान है।समिति के सदस्यों ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस उत्सव में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें और बूंदी को एकता, सद्भाव और संस्कृति की मिसाल बनाएं।बूंदी उत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि “सर्वधर्म एकता और सांस्कृतिक समरसता” का उत्सव है।गुरुद्वारों, मंदिरों, मस्जिदों और चर्चों तक पहुँचकर समिति ने एक सशक्त संदेश दिया है —“बूंदी उत्सव हर दिल का उत्सव है, हर धर्म का उत्सव है।”





