मालपुरा टोरड़ी_ संवाददाता(कमलेश प्रजापति)
“एक पेड़ मां के नाम” जैसे भावनात्मक और पर्यावरण-हितैषी अभियान का उद्देश्य था हर व्यक्ति को अपनी मां के नाम पर एक पेड़ लगाकर प्रकृति के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देना। लेकिन मालपुरा उपखंड क्षेत्र के पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, टोरड़ी में यह अभियान अब केवल खानापूर्ति तक सीमित रह गया है।विद्यालय परिसर में जुलाई 2025 में बड़े उत्साह से पौधारोपण किया गया था। लेकिन कुछ ही महीनों बाद पौधे अब या तो घास-फूस में दब गए हैं या बिना पानी और देखभाल के सूखकर खत्म हो चुके हैं।विद्यालय प्रशासन ने पौधे लगाने का कार्य तो दिखावे के लिए कर लिया, मगर उनकी संरक्षा और सिंचाई की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली।
ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय प्रबंधन ने इस अभियान को केवल “फोटो सेशन” तक सीमित कर दिया।कई पौधे आज भी प्लास्टिक के थैलों में बिना लगाए पड़े हैं, जबकि कुछ पूरी तरह सूख चुके हैं।ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन ने थोड़ी भी जिम्मेदारी दिखाई होती, तो आज विद्यालय परिसर हरियाली से भर चुका होता।एक ग्रामीण ने कहा — “पेड़ लगाना आसान है, पर उनकी परवरिश ही असली सेवा है। प्रशासन ने पेड़ों को मरने के लिए छोड़ दिया।”
राजकोषीय संसाधनों की बर्बादी
इस अभियान के तहत पौधारोपण, खाद, पानी और सुरक्षा पर राजकोष से व्यय किया गया था, मगर उसकी निगरानी नहीं की गई।अब यह अभियान न सिर्फ विफल प्रतीत होता है, बल्कि सरकारी धन की अनदेखी और बर्बादी का प्रतीक बन गया है।
अगर देखभाल हो, तो बदल सकती है तस्वीर
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर विद्यालय प्रशासन और स्थानीय समुदाय मिलकर पौधों की देखभाल करें, नियमित सिंचाई और संरक्षण सुनिश्चित करें, तो ये पौधे विद्यालय की सुंदरता और पर्यावरण संरक्षण दोनों में योगदान दे सकते हैं।फिलहाल, जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता से “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की मंशा और सच्चाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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