कोटा। vasundhara raje kota warning के रूप में सामने आई यह घटना राजस्थान के कोटा में गौवंश संरक्षण को लेकर गहराते संकट की ओर इशारा करती है। कोटा नगर निगम क्षेत्र में मृत पशुओं के निस्तारण की अव्यवस्था लंबे समय से चर्चा में थी, लेकिन अब यह मुद्दा सड़कों पर आ गया है। मृत गायों को खुले में फेंके जाने की घटनाओं से नाराज़ गौरक्षक लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना था कि यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि गौमाता के सम्मान के साथ भी सीधा खिलवाड़ है।
धरने पर बैठे गौरक्षक और जनता का आक्रोश
कोटा में गौरक्षकों का धरना कई दिनों से चल रहा था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मृत गायों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार नहीं किया जा रहा और इससे क्षेत्र में दुर्गंध, बीमारी और असंवेदनशीलता का माहौल बन रहा है। गौरक्षकों ने यह भी गंभीर आरोप लगाए कि मृत गायों की आड़ में जिंदा गायों की हत्या कर उनका गौमांस बेचा जा रहा है, जो कानून और आस्था—दोनों का उल्लंघन है।
वसुंधरा राजे का काफिला क्यों रुका
रविवार सुबह, जब राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे झालावाड़ से ब्यावर की ओर जा रही थीं, तभी कोटा में उनका काफिला रुका। सड़क पर चल रहे धरने और प्रदर्शन ने उनका ध्यान खींचा। जब उन्होंने स्वयं गाड़ी रुकवाकर गौरक्षकों से बातचीत की और उनकी समस्याएं ध्यानपूर्वक सुनीं।
“मैं सनातनी हूं” बयान का सियासी और सामाजिक संदेश
गौरक्षकों से बातचीत के दौरान वसुंधरा राजे ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं सनातनी हूं और गौमाता के संरक्षण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” vasundhara raje kota warning केवल एक प्रशासनिक टिप्पणी नहीं थी, बल्कि इसमें धार्मिक आस्था, सामाजिक जिम्मेदारी और राजनीतिक संदेश—तीनों स्पष्ट रूप से झलकते हैं।
डीआईजी और एसपी को मौके पर बुलाने का आदेश
गौरक्षकों के आरोप सुनने के बाद वसुंधरा राजे ने तुरंत कोटा रेंज के डीआईजी राजेंद्र गोयल और एसपी तेजस्विनी गौतम को मौके पर बुलाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पूरे मामले की गहन जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
“जनता चुस्त, अफसर सुस्त” पर तीखी टिप्पणी
अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए वसुंधरा राजे ने कहा, “गौरक्षक प्रदर्शन कर रहे हैं और अधिकारी सुन नहीं रहे। जनता चुस्त है और अफसर सुस्त हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि 14 दिसंबर से लोग आवाज उठा रहे हैं, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “ऐसा नहीं चलेगा।”
मृत गायों के निस्तारण में लापरवाही का आरोप
गौरक्षकों का आरोप है कि मृत मवेशियों को न तो दफनाया जा रहा है और न ही किसी वैज्ञानिक प्रक्रिया से उनका निस्तारण हो रहा है। शवों को खुले में फेंक दिया जाता है, जिससे मानवीय और धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। इस मुद्दे को राज्यस्तरीय चर्चा में ला खड़ा किया है और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पुलिस कार्रवाई और दर्ज मामला
धरना और विरोध तेज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। डीएसपी मनीष शर्मा के अनुसार, गौरक्षकों की शिकायत पर मृत मवेशी उठाने वाले ठेकेदार के खिलाफ आरकेपुरम थाने में मामला दर्ज किया गया है। दर्ज रिपोर्ट में आरोप है कि ठेकेदार शवों से चमड़ी उधेड़ता है और उन्हें बेकद्री से फेंक देता है, न कि दफनाता है। पुलिस ने जांच के बाद आगे की कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
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