सीएडी उपखंड मांगरोल के कार्यालय परिसर में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता सहायक अभियंता गुलाब सैनी ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य उपखंड के अंतर्गत आने वाली नहरों की सफाई और मजबूती से संबंधित कार्यों की समीक्षा करना और आगामी रवि रेगुलेशन से पूर्व नहरों की स्थिति को बेहतर बनाना था। बैठक में नरेगा के तहत कार्य कराने वाले मेटों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया ताकि वे नहरों की साफ-सफाई और मरम्मत के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
नहरों की सफाई और मजबूती पर जोर
बैठक में सहायक अभियंता गुलाब सैनी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नहरों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए ताकि सिंचाई के दौरान पानी का प्रवाह सुचारू रहे। उन्होंने कहा कि नहरों के किनारों की मिट्टी से मजबूती (बैंक स्ट्रेंथनिंग) बहुत आवश्यक है, जिससे रिसाव रोका जा सके और खेतों तक पर्याप्त जल पहुँच सके। सैनी ने सभी मेटों से आग्रह किया कि वे नहरों की देखरेख को जिम्मेदारी से निभाएँ और समय पर कार्य पूर्ण करें।
सुझाव और सहभागिता से हुई चर्चा
बैठक के दौरान उपस्थित सभी मेटों से आवश्यक सुझाव भी लिए गए ताकि आगामी रवि रेगुलेशन से पहले नहरों को उत्तम स्थिति में लाया जा सके। मेटों ने बताया कि कई स्थानों पर जल निकासी और मिट्टी जमाव जैसी समस्याएँ आती हैं, जिन पर सामूहिक प्रयास से काम किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि सभी कार्यों में स्थानीय समुदाय और नरेगा कर्मियों की सहभागिता से ही स्थायी समाधान संभव है।
उत्कृष्ट कार्य करने वालों को मिला सम्मान
सीएडी विभाग ने इस बैठक में एक प्रेरणादायक कदम उठाते हुए अच्छा कार्य करने वाले मेटों को गिफ्ट देकर सम्मानित किया। यह पहल न केवल कार्यकर्ताओं को प्रेरित करेगी बल्कि अन्य मेटों को भी बेहतर कार्य करने की दिशा में प्रोत्साहित करेगी। गुलाब सैनी ने कहा कि “जो मेट समय पर और गुणवत्तापूर्ण कार्य करेंगे, उन्हें भविष्य में भी प्राथमिकता दी जाएगी।”
अधिकारियों और प्रतिनिधियों की उपस्थिति
बैठक में सुरेश चौधरी (कनिष्ठ अभियंता), आर.पी. मीणा (कनिष्ठ अभियंता), और भैरूलाल सुमन (मुंडला माइनर समिति सदस्य) सहित कई अन्य अधिकारी और मेट उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर नहरों की साफ-सफाई, मरम्मत और विकास के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया।
सामूहिक जिम्मेदारी से होगा विकास
सीएडी मांगरोल की यह पहल न केवल जल संसाधन प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है बल्कि ग्रामीण विकास की भावना को भी सशक्त करती है। ऐसी सामूहिक पहल से न केवल रवि सीजन की सिंचाई व्यवस्था सुचारू होगी, बल्कि जल संरक्षण और नहरों के रखरखाव में भी दीर्घकालिक सुधार देखने को मिलेगा।
संवाददाता: जय प्रकाश शर्मा





