जयपुर , संवाददाता : सत्यनारायण शर्मा
जब अस्पताल ही बीमार हो जाए, तो उसका इलाज कौन करेगा? यह सवाल आज आंधी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की हकीकत पर बिल्कुल फिट बैठता है। यहां प्रतिदिन करीब 400 मरीज ओपीडी में आते हैं, लेकिन उनके इलाज के लिए केवल एकमात्र चिकित्सक उपलब्ध है। नतीजा — मरीजों की लंबी कतारें, उपचार में देरी और जनता की बढ़ती परेशानी।
सैकड़ों गांवों की उम्मीद एक डॉक्टर
आंधी सीएचसी केवल शहर के लिए ही नहीं बल्कि आसपास के सैकड़ों गांवों के लोगों के लिए भी प्रमुख चिकित्सा केंद्र है।गांवों से रोज़ाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं, लेकिन एक ही डॉक्टर के सहारे इतना बड़ा अस्पताल चलाना व्यवहारिक रूप से असंभव हो चुका है।रात और दिन दोनों समय एक ही चिकित्सक पर पूरा बोझ है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।
मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा
सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण लोगों को निजी चिकित्सकों के पास जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।यहां तक कि सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी मरीजों को महंगे इलाज के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति वर्षों से चली आ रही है, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन और राजनीति दिखाई देती है।सरकार के रिकॉर्ड में तो डॉक्टर पूरे हैं, लेकिन हकीकत में अस्पताल खाली पड़ा है।स्थानीय निवासी, आंधी
कागज़ों में तैनाती, मैदान में अनुपस्थिति
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई चिकित्सकों की तैनाती कागजों पर दिखाई जाती है, जबकि वे अस्पताल में उपस्थित नहीं रहते।यह गंभीर लापरवाही न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाती है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोर हकीकत को भी उजागर करती है।रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कई महीनों से अस्पताल प्रशासन द्वारा चिकित्सक पदों को भरने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
जनता में बढ़ता आक्रोश
आंधी क्षेत्र की जनता अब इस स्थिति से नाराज़ है। लोगों का कहना है कि चुनावी समय में नेता अस्पतालों के विकास की बड़ी बातें करते हैं, लेकिन हकीकत में हालात जस के तस हैं।मरीजों को कई घंटे लाइन में खड़े रहना पड़ता है, और कभी-कभी बिना इलाज ही घर लौटना पड़ता है।“सरकार कहती है कि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो रही हैं, लेकिन हमारा अस्पताल तो खुद इलाज मांग रहा है।”— एक महिला मरीज, आंधी सीएचसी





