बूंदी, संवाददाता: हेमराज सैनी
बूंदी जिले में Hospital Negligence Rajasthan की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर जिला मुख्यालय के सबसे बड़े अस्पताल तक स्वास्थ्य सेवाएँ लगातार चरमराती नज़र आ रही हैं। पिछले पंद्रह दिनों में एक के बाद एक चार गंभीर घटनाएँ सामने आईं, जिनमें नवजात बच्चों और गर्भवती महिला की मौत शामिल है। यह स्थिति जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।
Hospital Negligence Rajasthan—समस्या की जड़
जिले में स्वास्थ्य सेवाएँ लंबे समय से संसाधनों की कमी, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और प्रशासनिक लापरवाही का शिकार रही हैं। Hospital Negligence Rajasthan शब्द सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि वर्तमान स्थिति की वास्तविक तस्वीर है जिसमें मरीजों का जीवन खतरे में पड़ने लगा है।
एक पखवाड़े में 4 बड़ी घटनाएँ
इन घटनाओं ने पूरे जिले में दहशत और नाराज़गी दोनों पैदा कर दी:
28 नवंबर:
गर्भ में 9 महीने के शिशु की मौत—परिजन उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए फूट-फूट कर रोते रहे।
29 नवंबर:
चार महीने की बच्ची की अंगुली कैनुला हटाते समय कट गई—यह घटना स्वास्थ्य कर्मियों की गंभीर असावधानी को दर्शाती है।
गर्भवती महिला की मौत:
चौतरां का खेड़ा निवासी इंद्रा कंवर की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया—एक महिला चिकित्सक को APO भी किया गया।
नवजात शिशु की मौत:
शुक्रवार को हुई इस घटना के बाद परिजन नवजात के शव को लेकर जनाना अस्पताल गेट पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया।
इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया कि अस्पताल में निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही पूरी तरह नदारद है।
लाखेरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली
Hospital Negligence Rajasthan सिर्फ जिला अस्पताल तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण CHC तक भी फैल चुकी है। लाखेरी CHC की स्थिति बेहद गंभीर है: वहाँ सिर्फ एक चिकित्सक कार्यरत है,कई डॉक्टर बिना अवकाश स्वीकृत कराए गायब,OPD, IPD और Emergency सेवाएँ नियमित रूप से प्रभावित,एक दंत रोग विशेषज्ञ को प्रभारी बनाकर भेजा गया, जबकि क्षेत्र को जनरल फिजिशियन की आवश्यकता है, डॉ. वेदान्ती सिंह और डॉ. अनिल गुप्ता की अनुपस्थिति ने स्थिति और बिगाड़ दी। यह स्पष्ट है कि लाखेरी जैसी जनसंख्या वाले क्षेत्र में एक चिकित्सक से अस्पताल नहीं चल सकता।
जिला अस्पताल में बढ़ती घटनाएँ और गंभीर लापरवाही
जिला अस्पताल में लगातार लापरवाही देखने को मिल रही है। नवजात मौत,गर्भवती की मौत,बच्ची की अंगुली कटने की घटना,परिजनों के मोबाइल छीनकर फेंकना (सुरक्षा गार्ड द्वारा), इन सभी घटनाओं के बाद भी अस्पताल स्टाफ की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। Hospital Negligence Rajasthan की ऐसी घटनाएँ दिखाती हैं कि सिस्टम की पकड़ ढीली हो चुकी है।
परिजनों का आक्रोश और अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
नवजात की मौत के बाद परिजन मुख्य गेट पर शव लेकर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा: “हम वीडियो बनाते तो गार्ड ने मोबाइल छीनकर फेंक दिया!” शहर कोतवाल रमेशचंद आर्य मौके पर पहुँचे और परिजनों को पोस्टमार्टम कराने के लिए सहमत किया। PMO लक्ष्मीनारायण मीणा ने बताया कि संबंधित महिला गार्ड को हटा दिया गया है। लेकिन यह कार्रवाई केवल सतही है—लोग इसके पीछे वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई चाहते हैं।
डॉक्टरों की कमी से क्यों बिगड़ रही हैं सेवाएँ
डॉक्टरों की कमी इस संकट की जड़ है: लगातार ट्रांसफर, अनुपस्थित डॉक्टर, विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, ग्रामीण अस्पतालों पर अनावश्यक भार, Hospital Negligence Rajasthan के मामलों में अक्सर पाया गया है कि जहाँ डॉक्टरों की संख्या कम होती है, वहाँ लापरवाही और देरी की शिकायतें अधिक मिलती हैं।
औचक निरीक्षण सिर्फ कागजों तक सीमित
जिला प्रशासन और उच्च चिकित्सा अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले “औचक निरीक्षण” सिर्फ फाइलों में दिखाई देते हैं। जमीनी हकीकत यह है कि— अस्पतालों में सफाई व्यवस्था खराब,स्टाफ की कमी,मशीनरी खराबलापरवाही के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जनता का सवाल बिल्कुल सही है: “जब निरीक्षण हो रहे हैं, तो अव्यवस्थाएँ क्यों बढ़ रही हैं?”
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